Jamshedpur (Jharkhand) : राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक बेटियों को पढ़ाने-बढ़ाने और शिक्षित कर उन्हें सशक्त बनाने के लिए अभियान चला रही है। समय-समय पर इसके संकल्प दोहराए जाते हैं। वहीं, झारखंड-बिहार के एकमात्र महिला विश्वविद्यालय ‘जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी’ में छात्राओं को पैसे के बल पर पास और फेल करने का मामला प्रकाश में आया है। यह मामला यूनिवर्सिटी के बायोटेक विभाग से जुड़ा है। इस मामले में लोकभवन (पूर्व में राजभवन) ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। इसकी जांच के लिए लोकभवन की ओर से चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।

कमेटी में ये हैं शामिल
इस शिकायत पर लोकभवन की ओर से चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी में यूनिवर्सिटी की डीएसडब्ल्यू डॉ. किश्वर आरा, प्रॉक्टर डॉ. सुधीर कुमार साहू, डॉ. अमृता कुमारी और डॉ. अन्नपूर्णा झा शामिल हैं।
क्या है मामला
जानकारी के अनुसार, जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी के बायोटेक विभाग में परीक्षा के दौरान कुछ छात्राओं को बेहतर अंकों से पास करने के नाम पर अवैध उगाही की जाती थी। यहां तक कि परीक्षा से पूर्व पैसे लेकर कई छात्राओं को कुछ चुनिंदा प्रश्नों के नोट्स भी उपलब्ध करा दिए जाते थे। विभाग के शिक्षक डॉ. विश्व राज लाल परीक्षा के दौरान छात्राओं से पास करने के नाम पर रुपयों की वसूली करते थे। इसका एक हिस्सा पूर्व रजिस्ट्रार प्रो. राजेंद्र जायसवाल और परीक्षा नियंत्रक डॉ. रमा सुब्रह्मण्यम तक भी पहुंचता था।
कौन हैं डॉ. विश्व राज लाल
डॉ. विश्व राज लाल राजधानी रांची के निवासी हैं। यूनिवर्सिटी जब जमशेदपुर वीमेंस कॉलेज हुआ करती थी, तब से ही डॉ. विश्व राज लाल यहां कार्यरत हैं। वे अपने नाम से कई रिसर्च और कई जगहों पर सम्मानित होने का भी दावा करते हैं। बताते हैं कि उनके कई शोध नामचीन जर्नल में भी प्रकाशित हो चुके हैं, बावजूद वे अभी भी जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी में नीड बेस्ड अथवा अनुबंध आधारित शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। उनका पहनावा स्थायी यानी नियमित शिक्षकों की तुलना में अधिक बेहतर होता है।
पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेंद्र जायसवाल
यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार प्रो. राजेंद्र जायसवाल 2008 बैच के शिक्षक हैं। यूनिवर्सिटी के प्रथम व द्वितीय रजिस्ट्रार के बाद लगभग पांच या छह बार (छह-छह महीने का कार्यकाल) रजिस्ट्रार रहे। जब भी इनका छह महीने का कार्यकाल समाप्त होता, लोकभवन (तत्कालीन राजभवन) से इन्हें पद पर बने रहने का पत्र आ जाता था। अब जबकि यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. अंजिला गुप्ता कोल्हान विश्वविद्यालय की कमान संभाल चुकी हैं, यहां की प्रभारी हैं। इसके बाद डॉ. सलोमी कुजूर नई रजिस्ट्रार बनाई गई हैं।
परीक्षा नियंत्रक डॉ. रमा सुब्रह्मण्यम
यूनिवर्सिटी की परीक्षा नियंत्रक डॉ. रमा सुब्रह्मण्यम यूनिवर्सिटी की स्थापना के समय से ही इस पद पर रहीं। सेवानिवृत्ति की आयु सीमा पूरी होने के बाद भी यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उन्हें इस पद की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया। यूनिवर्सिटी सूत्रों के अनुसार, एक बार तो डॉ. सुब्रह्मण्यम ने तत्कालीन कुलपति को इस पद से मुक्त करने के लिए लिखित तौर पर दे दिया था। बावजूद उनके आवेदन को अस्वीकृत कर दिया गया।
जांच के बारे में कुछ पता नहीं : प्रवक्ता
इस मामले व जांच कमेटी के बारे में पूछने पर यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर सह प्रवक्ता सुधीर कुमार साहू ने कहा कि इस संबंध में उन्हें कुछ पता नहीं है। हालांकि, लोकभवन की ओर से गठित जांच कमेटी में डॉ. सुधीर कुमार साहू भी शामिल हैं।
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