रांची : झारखंड में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान विभिन्न विभागों में योजना मद के खर्च की रफ्तार पिछले साल की तुलना में धीमी रही है। 31 जनवरी 2026 तक कुल बजटीय प्रावधान का केवल 47 प्रतिशत ही खर्च हो सका है, जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25 में इसी अवधि तक 58 प्रतिशत राशि खर्च की जा चुकी थी। यानी इस बार जनवरी तक 11 फीसदी कम व्यय दर्ज किया गया है।
9 फरवरी को सचिव (व्यय) की अध्यक्षता में बजटीय उपबंध के विरुद्ध व्यय की समीक्षा की गई। बैठक में झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों-ग्रामीण विकास, पथ निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, नगर विकास समेत अन्य विभागों-के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। समीक्षा में स्पष्ट हुआ कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब डेढ़ माह शेष है, लेकिन कई विभागों में खर्च लक्ष्य के अनुरूप नहीं है।
पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में 31 मार्च तक कुल 89 प्रतिशत राशि खर्च कर ली गई थी। ऐसे में इस बार मार्च से पहले व्यय की रफ्तार बढ़ाना विभागों के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है। हालांकि, फरवरी के खर्च का विवरण अभी बाकी है।
केंद्रांश में देरी से योजनाएं प्रभावित
समीक्षा के दौरान सामने आया कि कई केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्रांश की राशि समय पर नहीं मिलने या आंशिक रूप से मिलने के कारण राज्यांश की राशि खर्च नहीं हो पा रही है। इससे ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा और आधारभूत संरचना से जुड़ी योजनाएं प्रभावित हुई हैं। सचिव (व्यय) ने निर्देश दिया कि जिन योजनाओं में इस वित्तीय वर्ष में केंद्रांश मिलने की संभावना नहीं है, उनमें राज्यांश की राशि तत्काल प्रत्यर्पित की जाए।
स्वीकृति और यूसी में अड़चन
कुछ विभागों में तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृतियां लंबित हैं। वहीं, क्षेत्रीय कार्यालयों से उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) समय पर नहीं मिलने से राशि विमुक्ति प्रभावित हो रही है। विभागों को योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, लंबित स्वीकृतियों को शीघ्र पूरा करने और यूसी समय पर प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
इतना है कुल बजट
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए झारखंड का कुल बजट लगभग ₹1,45,400 करोड़ निर्धारित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 13 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद जनवरी तक खर्च की धीमी रफ्तार ने वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वित्त सचिव (व्यय) की समीक्षा में खुलासा
Nikhil Kumar रांची : झारखंड में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान विभिन्न विभागों में योजना मद के खर्च की रफ्तार पिछले साल की तुलना में धीमी रही है। 31 जनवरी 2026 तक कुल बजटीय प्रावधान का केवल 47 प्रतिशत ही खर्च हो सका है, जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25 में इसी अवधि तक 58 प्रतिशत राशि खर्च की जा चुकी थी। यानी इस बार जनवरी तक 11 फीसदी कम व्यय दर्ज किया गया है।
9 फरवरी को सचिव (व्यय) की अध्यक्षता में बजटीय उपबंध के विरुद्ध व्यय की समीक्षा की गई। बैठक में झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों-ग्रामीण विकास, पथ निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, नगर विकास समेत अन्य विभागों- के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। समीक्षा में स्पष्ट हुआ कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब डेढ़ माह शेष है, लेकिन कई विभागों में खर्च लक्ष्य के अनुरूप नहीं है।
पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में 31 मार्च तक कुल 89 प्रतिशत राशि खर्च कर ली गई थी। ऐसे में इस बार मार्च से पहले व्यय की रफ्तार बढ़ाना विभागों के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है। हालांकि, फरवरी के खर्च का विवरण अभी बाकी है।
केंद्रांश में देरी से योजनाएं प्रभावित
समीक्षा के दौरान सामने आया कि कई केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्रांश की राशि समय पर नहीं मिलने या आंशिक रूप से मिलने के कारण राज्यांश की राशि खर्च नहीं हो पा रही है। इससे ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा और आधारभूत संरचना से जुड़ी योजनाएं प्रभावित हुई हैं। सचिव (व्यय) ने निर्देश दिया कि जिन योजनाओं में इस वित्तीय वर्ष में केंद्रांश मिलने की संभावना नहीं है, उनमें राज्यांश की राशि तत्काल प्रत्यर्पित की जाए।
स्वीकृति और यूसी में अड़चन
कुछ विभागों में तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृतियां लंबित हैं। वहीं, क्षेत्रीय कार्यालयों से उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) समय पर नहीं मिलने से राशि विमुक्ति प्रभावित हो रही है। विभागों को योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, लंबित स्वीकृतियों को शीघ्र पूरा करने और यूसी समय पर प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
इतना है कुल बजट
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए झारखंड का कुल बजट लगभग ₹1,45,400 करोड़ निर्धारित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 13 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद जनवरी तक खर्च की धीमी रफ्तार ने वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

