Ranchi: झारखंड हाई कोर्ट में निलंबित आइएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। यहां जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत में साफ किया गया है कि आइएएस विनय चौबे को बेल मिलने पर वह बाहर निकल कर सुबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। यही नहीं, गवाहों को भी डराया धमकाया जा सकता है।
यह मामला हजारीबाग में तैनाती के दौरान सरकारी और प्रतिबंधित जमीनों के कथित अवैध हस्तांतरण से जुड़ा है। इसमें एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने विनय चौबे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक आईएएस अधिकारी जिले में सरकार का प्रतिनिधि और रिकॉर्ड का संरक्षक होता है। ऐसे में उससे उच्चतम ईमानदारी की उम्मीद की जाती है।
अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि याचिकाकर्ता बिचौलियों के जरिए इन लेन-देन में गहराई से शामिल थे। अपने पद की ताकतों का दुरुपयोग कर कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में सामाजिक-आर्थिक अपराधों में इजाफा हुआ है। यह अपराध न केवल देश की आर्थिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि शासन प्रणाली पर जनता के भरोसे को भी कमजोर करते हैं। ऐसे मामलों में उदारता दिखाना न्यायहित में नहीं है।
एसीबी की तरफ से अदालत को बताया गया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और कई अहम पहलुओं पर जांच अभी बाकी है। वहीं, ऐसे गवाहों के बयान भी कोर्ट के सामने पेश किए गए। जिनमें बिचौलियों के जरिए डीसी स्तर से भरोसा मिलने की बात कही गई है।
हालांकि, बचाव पक्ष ने दलील दी कि विनय चौबे को झूठे मामले में फंसाया गया है और प्रारंभिक प्राथमिकी में उनका नाम नहीं था, लेकिन हाईकोर्ट ने इन दलीलों को नहीं माना और जमानत देने से इनकार कर दिया।
Read Also- Chaibasa News : गीता बलमुचू को मिली भाजपा पश्चिमी सिंहभूम जिला अध्यक्ष की कमान

