रांची : झारखंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कार्यरत लोकपालों को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। मनरेगा आयुक्त मृत्युंजय कुमार बरनवाल ने राज्य के 14 जिलों में कार्यरत लोकपालों से अब किसी भी प्रकार का कार्य नहीं लेने का निर्देश संबंधित जिलों के उप विकास आयुक्त को को दिया है। संबंधित जिलों में नियुक्त या अतिरिक्त प्रभार पर कार्यरत लोकपालों की अधिकतम निर्धारित कार्य अवधि पूरी हो चुकी है

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चार वर्ष से अधिक अवधि का प्रावधान नहीं
पत्र में उल्लेख है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी मार्गदर्शिका के अनुसार लोकपाल की नियुक्ति पहली बार दो वर्ष के लिए होती है। इसके बाद एक-एक वर्ष के लिए अधिकतम दो बार अवधि विस्तार दिया जा सकता है। इस प्रकार लोकपाल की अधिकतम कार्य अवधि चार वर्ष या 68 वर्ष की आयु (जो पहले हो) तक सीमित है।
आयुक्त ने बताया कि देवघर, दुमका, धनबाद, बोकारो, गोड्डा, गढ़वा, लातेहार, गिरिडीह, कोडरमा, रामगढ़, खूंटी, पलामू, रांची और सिमडेगा जिलों में कार्यरत लोकपालों की चार वर्ष की अधिकतम अवधि पूरी हो चुकी है। ऐसे में मार्गदर्शिका के तहत उनका अवधि विस्तार संभव नहीं है।
रिकॉर्ड सौंपने और बकाया भुगतान के निर्देश
आदेश में सभी उपायुक्त-सह-जिला कार्यक्रम समन्वयक और उप विकास आयुक्तों को निर्देश दिया गया है कि पत्र निर्गत होने की तिथि से संबंधित लोकपालों से कोई कार्य न लिया जाए। साथ ही लोकपालों से सभी अभिलेख और दस्तावेज प्राप्त कर कार्यालय को सूचना देने तथा उनके अनुमन्य लंबित बकाये का भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया है। इस संबंध में लोकपालों को भी जानकारी दी गई है।
इस निर्णय के बाद राज्य में मनरेगा से जुड़ी शिकायतों की निगरानी व्यवस्था को लेकर नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया अब की जाएगी ।

