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Jharkhand Politics News: झारखंड लोकभवन का नाम बिरसा भवन रखेगी सरकार

संसदीय कार्यमंत्री ने केंद्र के ‘लोकभवन’ नाम को किया खारिज, सदन में रखा प्रस्ताव

by Anand Kumar
Parliamentary Affairs Minister Radhakrishna Kishore
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उप राजधानी दुमका स्थित लोकभवन का नाम सिदो-कान्हू के नाम पर रखा जायेगा

Ranchi : झारखंड विधानसभा में बुधवार को उस समय जोरदार हलचल हुई जब संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने रांची स्थित राजभवन का नाम ‘बिरसा भवन’ और उपराजधानी दुमका के राजभवन का नाम ‘सिदो-कान्हू भवन’ करने का प्रस्ताव सदन के पटल पर रख दिया। मंत्री ने केंद्र द्वारा 3 दिसंबर को जारी अधिसूचना, जिसमें देशभर के राजभवनों का नाम बदलकर ‘लोकभवन’ करने का निर्देश दिया गया था, को सिरे से खारिज कर दिया।

राधाकृष्ण किशोर ने सदन को संबोधित करते हुए कहा, “राजभवन राज्य सरकार की संपत्ति है। इसका निर्माण, रखरखाव और संचालन राज्य सरकार के पैसे से होता है। संविधान के अनुच्छेद-154 के तहत राज्य की कार्यकारी शक्ति गवर्नर में निहित होती है, इसलिए उनका कार्यालय भी राज्य कार्यालय है। राज्य सरकार को ही अपनी संपत्ति का नामकरण करने का पूर्ण अधिकार है।”मंत्री ने स्पष्ट किया कि औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति की बात सही है, लेकिन नाम बदलते समय राज्य के महान स्वतंत्रता सेनानियों और आदिवासी नायकों को सम्मान देना भी जरूरी है। “भगवान बिरसा मुंडा और सिदो-कान्हू ने इस धरती के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनके नाम पर राजभवन का नामकरण झारखंड की अस्मिता का सम्मान होगा।”

ज्ञात हो कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 3 दिसंबर को देशभर के सभी राजभवनों का नाम बदलकर ‘लोकभवन’ और राजनिवास को ‘लोकनिवास’ करने का निर्देश जारी किया था। इसके बाद राज्यपाल के सचिवालय ने तुरंत अधिसूचना जारी कर रांची के राजभवन को ‘लोकभवन’ घोषित कर दिया था। इस कदम से सत्ताधारी गठबंधन में नाराजगी पैदा हो गई थी।

रांची का ऐतिहासिक राजभवन करीब 52 एकड़ में फैला है और इसका निर्माण 1930 में शुरू होकर मार्च 1931 में मात्र 7 लाख रुपये की लागत से पूरा हुआ था। वहीं दुमका स्थित राजभवन उपराजधानी का प्रतीक है। सदन में प्रस्ताव रखते ही सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेजें थपथपाकर समर्थन जताया। विपक्ष ने भी इस प्रस्ताव का मौन समर्थन किया। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि प्रस्ताव को शीघ्र कैबिनेट की मंजूरी दिलाई जाएगी और इसके बाद अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।

राज्य सरकार का यह कदम केंद्र और राज्य के बीच प्रोटोकॉल व अधिकार क्षेत्र की नई बहस को जन्म दे सकता है। सूत्रों का कहना है कि प्रस्ताव पारित होने के बाद राज्यपाल सचिवालय को नई अधिसूचना जारी करने को कहा जाएगा।

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