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Chaibasa Illegal Mining झारखंड के बालू माफियाओं में शुरू हुई वर्चस्व की जंग, सरकार और प्रशासन की अनदेखी से विस्फोटक हो सकते हैं हालात

ट्रैक्टर और डंपर से बालू ढोने वाले आमने–सामने, बालू लदे डंपर को रोका, ट्रैक्टर मालिकों ने विधायक जगत माझी से की शिकायत

by Rajeshwar Pandey
Chaibasa illegal mining
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चाईबासा : झारखंड में बालू घाटों पर सरकार की अस्पष्ट नीति अब सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने लगी है। अवैध रूप से बालू खनन और परिवहन को बढ़ावा देने के कारण गुटबाजी चरम पर है और संघर्ष की स्थिति बन गई है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा में इसी तरह का मामला सामने आया है। यहां बालू खनन को लेकर ट्रैक्टर और डंपर संचालक आमने-सामने आ गए हैं।

मंगलवार (4 नवंबर 2025) की रात बालू के धंधे में लिप्त ट्रैक्टर संचालकों ने गोइलकेरा-मनोहरपुर मार्ग (एनएच 320डी) में डेरोवां चौक के पास बालू का परिवहन कर रहे दर्जनों डंपरों को रोक दिया। ट्रैक्टर संचालकों का कहना है कि प्रशासन द्वारा बालू लदे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को पकड़ा जा रहा है और डंपरों से बालू की ढुलाई पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। अगर बालू का धंधा होगा तो डंपरों के साथ ट्रैक्टरों को भी बालू ढोने की अनुमति देनी होगी। ट्रैक्टर संचालकों ने इस मामले की जानकारी मनोहरपुर के झामुमो विधायक जगत माझी को भी दी है।

बालू घाटों का टेंडर कराने में हेमंत सरकार विफल

गोइलकेरा में भरडीहा, पोकाम, दलकी, रायम और माराश्रम में कोयल नदी से बड़े पैमाने पर बालू का खनन किया जाता है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के आधे क्षेत्र को इन्हीं जगहों से बालू की सप्लाई होती है। लेकिन, 2019 से इन घाटों का टेंडर नहीं हो रहा है। हेमंत सोरेन की सरकार घाटों से बालू खनन को वैधता प्रदान नहीं कर पा रही है, जिसके चलते बालू घाटों से अवैध खनन किया जाता है। इसमें डंपर और ट्रैक्टर संचालक समान रूप से लिप्त हैं।

अधिकांश कारोबारी सत्तारूढ़ दलों के कार्यकर्ता, सरकार को करोड़ों का नुकसान

बालू के अवैध धंधे में लिप्त अधिकांश कारोबारी सत्तारूढ़ दलों के कार्यकर्ता हैं। क्षेत्र में रोजगार और पलायन की भयंकर समस्या के बीच बालू का अवैध धंधा गोइलकेरा में रोजगार का सबसे बड़ा साधन बन गया है। लोग मनरेगा और सरकारी योजनाओं का काम छोड़कर ट्रैक्टर और डंपर खरीद कर इस धंधे में उतर रहे हैं। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और नेता बालू माफियाओं को सपोर्ट करते हैं। वहीं अवैध बालू खनन और परिवहन से हर महीने सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

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