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JP Central Jail Hazaribagh Escape Case : JP सेंट्रल जेल से फरारी की गुत्थी बरकरार, 24 घंटे बाद भी तीनों कैदी लापता

by Rakesh Pandey
JP Central Jail Hazaribagh Escape Case
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हजारीबाग : झारखंड की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा (JP Central Jail Hazaribagh) से फरार हुए तीन कैदियों का 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। इस हाई-प्रोफाइल जेल ब्रेक की घटना ने जेल प्रशासन के साथ-साथ पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फरार कैदियों की तलाश में पुलिस ने राज्य के भीतर और बाहर व्यापक स्तर पर छापेमारी अभियान तेज कर दिया है।

JP Central Jail Hazaribagh Escape Case: कैसे फरार हुए कैदी

जेल अधीक्षक चंद्रशेखर प्रसाद सुमन के अनुसार, तीनों कैदी बैरक नंबर-6 के वार्ड नंबर-4 से फरार हुए। जांच में सामने आया है कि कैदियों ने बैरक की खिड़की का ग्रिल काटा और रात करीब 1:36 बजे से 2:45 बजे के बीच जेल परिसर से निकलने में सफल रहे। घटना के तुरंत बाद लोहसिंघना थाना में मामला दर्ज किया गया। फरार कैदियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 224 (हिरासत से भागना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

पुलिस ने जेल परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। इसके साथ ही फोरेंसिक टीम को भी जांच में लगाया गया है, जो फरार कैदियों और उनके संभावित संपर्कों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही कैदियों की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

SIT का गठन, कई राज्यों में रेड

हजारीबाग एसपी के निर्देश पर इस पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। फिलहाल पांच अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। धनबाद और रांची के अलावा एक टीम को बिहार भी भेजा गया है। पुलिस ने फरार कैदियों के परिजनों और करीबी रिश्तेदारों के घरों पर भी दबिश दी है। अधिकारियों को उम्मीद है कि दबाव बढ़ने के साथ जल्द कोई अहम सुराग हाथ लग सकता है।

जेलकर्मियों पर गिरी गाज

प्रारंभिक जांच में लापरवाही सामने आने के बाद जेल प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। इस मामले में कुल 18 जेलकर्मी कार्रवाई के दायरे में आए हैं। वहीं, दो हेड वार्डन हरेंद्र महतो और उमेश सिंह को निलंबित कर दिया गया है। बताया गया है कि जिस वार्ड से कैदी फरार हुए, उस समय ड्यूटी इन्हीं दोनों के जिम्मे थी। जांच में यह भी सामने आया है कि कैदियों ने अंधेरा, धुंध और बिजली गुल होने की स्थिति का फायदा उठाकर फरारी की योजना को अंजाम दिया।

कुख्यात अपराधी भी शामिल

फरार कैदियों में कुख्यात देवा भुईया का नाम भी शामिल है, जो पहले भी वर्ष 2021 में धनबाद जेल से फरार हो चुका है। उसके खिलाफ कई संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। दूसरा फरार कैदी जीतेंद्र रवानी है, जो पोक्सो एक्ट के तहत 22 साल की सजा काट रहा था। तीसरा कैदी राहुल रजवार है, जिसे पोक्सो एक्ट के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। तीनों कैदियों का आपराधिक रिकॉर्ड इस मामले को और गंभीर बना देता है।

सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा

घटना के बाद जैप-7 के डीएसपी राजेंद्र कुमार ने जेल पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की है। जेल परिसर की निगरानी, बैरकों की स्थिति और सुरक्षा प्रोटोकॉल की दोबारा जांच की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि जांच पूरी होने के बाद सुरक्षा में चूक को लेकर और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।

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