कोलकाता: आरजी कर मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन अब एक नए विवाद में घिर चुका है। आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले ईएनटी विभाग के जूनियर डॉक्टर, डॉ. अशफाकुल्ला नाइया पर पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल ने फर्जी डिग्री इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। काउंसिल ने डॉ. नाइया को सात दिनों के भीतर पेश होने का निर्देश दिया है, अन्यथा उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने डॉ. अशफाकुल्ला के खिलाफ शिकायत दर्ज की। आरोप है कि सिंगुर में एक स्वास्थ्य सेवा संस्था द्वारा लगाए गए पोस्टर में डॉ. नाइया के नाम के साथ ‘एमएस’ (मास्टर ऑफ सर्जरी) लिखा गया था, जबकि उन्होंने यह कोर्स अभी पूरा नहीं किया था।
विवाद ने तूल पकड़ा, राज्य सरकार तक गूंज
इस मामले ने तूल पकड़ते हुए राज्य के मुख्य सचिव तक अपनी गूंज पहुंचाई। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे को लेकर मुख्य सचिव और मेडिकल काउंसिल को पत्र लिखा था, जिसके बाद यह नोटिस जारी किया गया।
डॉ. अशफाकुल्ला का बयान
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. अशफाकुल्ला नाइया ने गुरुवार को कहा, “नोटिस में कोई तारीख या हस्ताक्षर नहीं हैं, जिससे यह स्पष्ट नहीं होता कि मुझे कहां और किससे मिलना है। मुझे पहले से ही इस तरह की प्रतिक्रिया का अंदाजा था। जब आप अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो प्रतिशोध झेलना पड़ता है। अगर यह नोटिस आधिकारिक है, तो मैं इसका जवाब जरूर दूंगा।”
सिंगुर की संस्था की सफाई
इस विवाद में सिंगुर की स्वास्थ्य सेवा संस्था ने भी अपनी सफाई दी है। संस्था के अधिकारियों ने कहा, “हमारे अनुरोध पर डॉ. अशफाकुल्ला नाइया और कई अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर हमारे स्वास्थ्य शिविरों में भाग लेते थे। वे निःस्वार्थ भाव से मरीजों का इलाज करते थे और कोई शुल्क नहीं लेते थे। उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं।”

