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गोरखपुर के कफील खान फिर विवादों में, किताब के जरिए लोगों को भड़काने का आरोप

by Rakesh Pandey
कफील खान फिर विवादों में
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लखनऊ। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पूर्व डॉक्टर कफील खान और पांच अज्ञात लोगों के खिलाफ उनकी किताब के प्रकाशन पर मामला दर्ज किया गया है, जिसका कुछ पाठ कथित तौर पर उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ है। डॉ कफील खान के खिलाफ लखनऊ के व्यवसायी मनीष शुक्ला ने शिकायत दर्ज कराई हैं, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि इस किताब के जरिए राज्य सरकार को उखाड़ फेंकने और केंद्र के खिलाफ बातें कही गई हैं।

व्यवसायी की शिकायत पर लखनऊ में हुआ केस
लखनऊ के थाना कृष्णा नगर के थाना प्रभारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि डॉ कफील खान और पांच अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने कृष्णा नगर के व्यवसायी मनीष शुक्ला की शिकायत पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं और प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम के उल्लंघन के तहत दर्ज किया है।

डॉ. कफील खान के समर्थकों में किताब का वितरण
डॉ. कफील खान की किताब उनके समर्थकों के बीच पैसा जुटाने, अपनी बेगुनाही साबित करने, राज्य सरकार को उखाड़ फेंकने और केंद्र सरकार को रोकने के साधन के रूप में वितरित और बेची गई है। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उन्होंने चार या पांच व्यक्तियों को फोन पर गुप्त अभियान के लिए धन प्राप्त करने के लिए समुदायों के बीच संघर्ष आयोजित करने की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए सुना।

2017 में अस्पताल में बच्चों की मौत के बाद चर्चा में आए थे कफील
कफील खान को 2017 में चिकित्सा सुविधा में कथित तौर पर ऑक्सीजन की कमी के कारण बच्चों की मौत के बाद चर्चा में आए थे। इस मामले में डॉ कफील खान और अन्य डॉक्टरों को भी आरोपी बनाया गया था। जिसके बाद सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इस मामले को लेकर उनके खिलाफ गोरखपुर पुलिस थाने में कई केस दर्ज हैं। इन दिनों वो अपनी किताब को लेकर सुर्खियों में हैं। इस किताब में उन्होंने गोरखपुर ऑक्सीजन कांड का भी जिक्र किया है और ऑक्सीजन की कमी के बारे में भी बताया है।

क्या हुआ था 2017 में
अगस्त, 2017 में गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज में दर्जनों बच्चों की मौत होने की खबर आई थी। कहा गया था कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई। कफील खान उस वक्त मेडिकल कॉलेज में बतौर बाल रोग विशेषज्ञ तैनात थे। उन पर लापरवाही का आरोप लगा था। 3 सितंबर, 2017 को उन्हें जेल भेज दिया गया था। 25 अप्रैल, 2018 को कफील जमानत पर रिहा हुए।

CAA के खिलाफ AMU में भड़काऊ भाषण देने पर लगा था रासुका
31 जुलाई, 2019 को कफील खान फिर सस्पेंड कर दिए गए। इस बार आरोप था कि वे बहराइच हॉस्पिटल में दूसरे डॉक्टर्स की ड्यूटी में दखलंदाजी कर रहे थे। दिसंबर, 2019 में उन्हें CAA के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में रासुका के तहत फिर गिरफ्तार किया गया। हालांकि, इस मामले में कोर्ट ने कफील के खिलाफ आपराधिक धाराओं में कार्रवाई को रद्द कर दी थी लेकिन कफील खान को कुछ महीने तक जेल में रहना पड़ा था।

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