रांची। झारखंड की राजनीति में तेजी से उभरती हुई नेता और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन को लेकर इन दिनों सियासी हलकों में नई चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि उन्हें जल्द ही राज्यसभा भेजा जा सकता है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। कल्पना गांडेय से विधायक हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कल्पना सोरेन उच्च सदन पहुंचती हैं तो इससे पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने में मदद मिलेगी । कल्पना सोरेन का बढ़ता राजनीतिक कद और उनका सक्रिय हस्तक्षेप संगठन को नई दिशा दे सकता है। पार्टी के भीतर इसे नई नेतृत्व पीढ़ी के उभरने के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। साथ ही, यह कदम संगठन और परिवार के बीच संतुलन बनाने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
राज्यसभा में आदिवासी अधिकार व महिला सशक्तीकरण को मिलेगा बल
यदि वह राज्यसभा जाती हैं तो झारखंड से जुड़े आदिवासी अधिकार, भूमि, खनिज संसाधन और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से उठाया जा सकेगा। इसके अलावा, उनका राज्यसभा पहुंचना महिला सशक्तीकरण और आदिवासी नेतृत्व को लेकर भी एक मजबूत संदेश देगा।
राज्य में राज्यसभा की दो सीटें खाली होने जा रही हैं। इनमें से एक सीट झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के कारण खाली हुई है, जबकि दूसरी सीट भाजपा नेता दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने से रिक्त होगी।
विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो सत्तारूढ़ महागठबंधन मजबूत स्थिति में है। झामुमो, कांग्रेस, राजद और वाम दलों के समर्थन से गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल है, जिससे दोनों सीटों पर जीत की संभावना प्रबल मानी जा रही है।
हालांकि, इस पूरे समीकरण में कांग्रेस की भूमिका भी अहम रहेगी। पार्टी के भीतर यह चर्चा है कि इस बार राज्यसभा सीटों में उसे भी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। ऐसे में गठबंधन के भीतर तालमेल और रणनीति ही आने वाले चुनाव का रुख तय करेगी।

