Kanke Thana Ranchi controversy : रांची : रांची पुलिस के दो मुंशी इन दिनों चर्चा में हैं। इनमें एक हैं आरक्षी रूपेश रजक और दूसरे आरक्षी अमित कुमार। दोनों को कांके थाने से हटाने का कमान पुलिस लाइन से काटा गया, फिर 24 घंटे के अंदर वापस कांके थाने का ही कमान दे दिया गया। इनका तबादला 24 घंटे के भीतर ही रोक लिया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासनिक गलियारों में कांके थानेदार के प्रभाव की चर्चा भी तेज है। पुलिस लाइन के सार्जेंट मेजर आनंद खलखो ने दोनों मुंशियों को हटाने के आदेश को वापस लेने की पुष्टि की है। जबकि, कांके थाना प्रभारी प्रकाश रजक का कहना है कि ऐसा कोई आदेश ही नहीं हुआ है।

सार्जेंट मेजर और थानेदार के आ रहे विरोधाभासी बयान
मुंशियों को थाने से हटाने के मामले में सार्जेंट मेजर और कांके थाना प्रभारी के विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। ‘द फोटोन न्यूज’ के संवाददाता ने जब सार्जेंट मेजर से बात कि तो उन्होंने बताया कि आरक्षी रूपेश रजक और आरक्षी अमित कुमार को कांके थाना से हटाने के लिए कमान काटा गया था। बाद में इस आदेश को वापस ले लिया गया है। दूसरी ओर कांके थानेदार ने बातचीत में बताया कि हटाने के लिए कमान ही नहीं काटा गया है। दोनों अफसरों के अगल-अगल बयान से मामला और उलझ रहा है।
अग्रिम जमानत मिलने और जमानत बांड भरने के बावजूद अवैध रूप से हिरासत में रखा
उल्लेखनीय है कि कांके थानेदार इन दिनों विवादों में चल रहे हैं। एक मामले में उनके खिलाफ विभगीय कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है। दरअसल, अनिल टाइगर हत्याकांड में कांके थाना में दर्ज कांड संख्या 90/2025 में अग्रिम जमानत मिलने और जमानत बांड भरने के बावजूद बिना किसी वारंट और कारण के कांके थानेदार ने देवब्रत नाथ शाहदेव को जबरन घर से उठा लिया और अवैध रूप से हिरासत में रखा।
इसके बाद देवब्रत के पिता दामोदार नाथ शाहदेव ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका (हेवियर्स कॉर्पस) दायर की थी। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया था। याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। जस्टिस आर. मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव की खंडपीठ ने रांची एसएसपी, कांके थानेदार और खूंटी थानेदार को 14 जनवरी को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट में अगली हियरिंग के दौरान कांके थाना प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। फिर रांची एसएसपी को नोटिस जारी कर पूछा गया था कि कांके थानेदार पर क्या कार्रवाई की गई है। लेकिन, इस संबंध में कोर्ट को कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
मनमाने तरीके से बिना किसी आधार के रात में किसी को उठा लिया जाना उचित नहीं
29 जनवरी को इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि पुलिस को कानून के तहत ही कार्रवाई करनी चाहिए। मनमाने तरीके से बिना किसी आधार के रात में किसी को उठा लिया जाना उचित नहीं। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने खंडपीठ को बताया कि मामले में कांके थाना प्रभारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई है। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका निष्पादित कर दी।
सार्जेंट मेजर का बयान
कांके थाना में पदस्थापित आरक्षी रूपेश रजक और आरक्षी अमित कुमार को थाना से हटाने के लिए कमान काटा गया था। लेकिन, अब आदेश को वापस ले लिया गया है।
-आनंद खलखो, सार्जेंट मेजर, पुलिस लाइन।
कांके थानेदार का बयान
आरक्षी रूपेश रजक और आरक्षी अमित कुमार को थाना से हटाने के लिए कमान नहीं काटा गया है। इस मामले में मैं सार्जेंट मेजर से बात करके बताता हूं।
प्रकाश रजक, थानेदार, कांके थाना।

