पॉलिटिकल डेस्क : रेलवे में नौकरी के बदले जमीन मामले (Land for job scam) में नई दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को फैसला नहीं सुनाया। इडी के द्वारा राजद सुप्रीमो लालू यादव की पत्नी सह बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी और उनकी बेटी राज्यसभा सांसद मीसा भारती के खिलाफ दायर आरोप पत्र पर संज्ञान लेने पर शनिवार को फैसला सुनाया जाना था। अदालत ने इस फैसले को टाल दिया है और अब 27 जनवरी को इससे जुड़ा फैसला सामने आएगा।

बता दें कि नौकरी के बदले जमीन मामले को ईडी ने मनी लांड्रिंग से जोड़ा है। ईडी की ओर से दायर की गई पहली चार्जशीट में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती, हेमा यादव आदि का नाम शामिल किया गया है।
20 जनवरी की सुनवाई टली (Land for job scam)
रेलवे में जमीन के बदले नौकरी मामले में ईडी की जांच चल रही है। ईडी ने मनी लांड्रिंग से जुड़ा मामला भी दर्ज किया है। रेलवे में नौकरी के बदले जमीन मामले में ईडी द्वारा पूर्व सीएम राबड़ी देवी और सांसद मीसा भारती के खिलाफ दायर आरोप पत्र को लेकर 20 जनवरी को फैसला सुनाया जाना था। ईडी के आरोप पत्र पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। इस फैसले की सुनवाई 20 जनवरी यानी शनिवार को होनी थी, लेकिन किसी कारणवश ये सुनवाई टल गई है।
ईडी ने दफ्तर में पेश होने का दिया आदेश
ईडी ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद को 29 जनवरी को और उनके बेटे उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को 30 जनवरी को अपने पटना दफ्तर में पेश होने को कहा है। रेलवे में नौकरी के बदले जमीन के इसी मामले में दो दिन पहले गुरुवार को कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। नौकरी के बदले जमीन घोटाले के मामले में ईडी की ओर से दाखिल आरोप पत्र पर संज्ञान लेने के पहलू पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनवाई की थी।
ED ने इस मामले में दायर पहली चार्जशीट में राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव का नाम लिखा है। इसके अलावा अमित कात्यालय, हृदयानंद चौधरी के नाम भी आरोप पत्र में शामिल किया गया है। कंपनियों में एके इंफोसिस्टम और एबी एक्सपोर्ट के नाम भी शामिल हैं।
अमित कात्याल को लिया था हिरासत में
बता दें कि आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव से कथित तौर पर जुड़े अमित कात्याल को जांच एजेंसी ने नौकरी के बदले जमीन घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में हिरासत में लिया था। मामला लगभग 15 साल पुराना है। उस समय लालू प्रसाद केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि लालू प्रसाद ने रेल मंत्री रहते हुए रेलवे में लोगों को नौकरी देने के बदले उनकी जमीन लिखवा ली थी! लालू प्रसाद 2004 से 2009 तक रेल मंत्री थे। इस मामले में बाद में ईडी की एंट्री हुई।
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