जमशेदपुर : साहित्य, सिनेमा एवं कला को समर्पित संस्था ‘सृजन संवाद’ की 158वीं गोष्ठी बुधवार को हुई, जिसमें लिथुआनियाई कहानियों पर चर्चा हुई। इस भाषा की कहानियां पहली बार हिंदी पाठकों के लिए उपलब्ध हुई हैं।

अनुराग रंजन द्वारा संचालित स्ट्रीमयार्ड तथा सृजन संवाद के फ़ेसबुक लाइव पर साहित्यकार-अनुवादक डॉ. रेखा सेठी से डॉ. बलवंत कौर ने लिथुआनियाई कहानी संग्रह ‘अंतिम दिन’ पर संवाद किया। इनका परिचय जौनपुर के अश्वनि तिवारी ने दिया। डॉ. विजय शर्मा ने स्वागत मंच पर उपस्थित तथा फ़ेसबुक लाइव से जुड़े साथियों का स्वागत करते हुए बताया कि इन कहानियों से गुजरते हुए उन्हें कई अन्य कहानियां, उपन्यास एवं फ़िल्मों मसलन सैमुअल बैकेट के गोदो, मार्केस की कहानियां याद आईं।
साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित कहानियों को एक नई भाषा हिंदी में डॉ. सेठी ने रूपांतरण किया है। साहित्य अकादमी की इस पहल का स्वागत करते हुए डॉ. रेखा सेठी को अनुवाद के लिए बधाई दी। संग्रह की आठों कहानियां अनोखे शिल्प में नकारात्मकता एवं सकारात्मकता के साथ रची गई हैं। आत्म-संघर्ष से उत्पन्न कहानियां पश्चिम के दर्शन से हट कर, भौतिक मृत्यु पश्चात चेतना की बात करती हैं। इस तरह का अनुवाद दो देशों, दो भाषा-संस्कृति को लांघ कर साहित्य को वैश्विक बनाता है।
डॉ. रेखा सेठी के संबंध में बताया कि वे साहित्य, शिक्षा, अनुवाद, संपादन से जुड़ी हुई हैं, उनकी 20 पुस्तकें प्रकाशित हैं। वे पहले भी सृजन संवाद के मंच पर आ चुकी हैं एवं मंच की सम्मानित सदस्य हैं। आज वे अपनी नई किताब पर बात करने के लिए उपस्थित हैं। ये बातें रिसर्च स्कॉलर अश्वनि तिवारी ने उनके परिचय में बताईं। किताब पर चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए तीस साल से मिरांडा हाउस से जुड़ी डॉ. बलवंत कौर उपस्थित हैं। मिस कौर आलोचक, अनुवादक तथा संपादक हैं। हिंदी, इंग्लिश, पंजाबी, उर्दू की जानकार डॉ. कौर ने राजेंद्र यादव रचनावली के 15 खंडों का संपादन किया है।
डॉ. कौर के आग्रह पर सर्वप्रथम डॉ. सेठी ने संग्रह की प्रथम कहानी -अंतिम दिन- के कुछ अंशों का पाठ किया। प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने अनुवाद के दौरान आने वाली कठिनाइयों एवं चुनौतियों पर चर्चा की। लिथुआनी भाषा इंग्लिश की बनिस्बत हिंदी के निकट है। अनुवाद इंग्लिश से हुआ है, लिथुआनिया भाषा से नहीं मगर मूल और इंग्लिश दोनों को सामने रख कर किया गया है। इस कार्य में उन्हें लिथुआनिया की राजदूत दियाना से काफ़ी सहायता मिली। नामों की देवनागरी में सही वर्तनी केलिए मारिया पुरी सहायक बनीं। इसी बीच लेखक से साहित्य अकादमी में मिस सेठी को लेखक से मिलने का अवसर मिला। उनसे ईमेल से अनुवाद के दौरान कई बार विचार-विमर्श हुआ।
किताब पढ़ कर खूब तैयारी के साथ आई डॉ. कौर बीच-बीच में कहानियों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी कर कार्यक्रम को आगे बढ़ाती गईं। वक्ता ने अन्य लोगों के प्रश्नों का भी उत्तर दिया। उन्होंने बताया कि लेखक यारोस्लावास मेलनिकस ने महाभारत खरीद कर पढ़ा। वे उससे बहुत प्रभावित हुए। इस प्रभाव की पुष्टि खासतौर पर -अंत- कहानी से होती है। कहानी पढ़ते हुए फ़िल्म – क्यूरियस केस ऑफ़ बेंजामिन बटन- की याद आती है। यहां केंद्र में एक स्त्री है और कहानी का अंत एवं ट्रीटमेंट भी भिन्न है। मनमोहन चड्ढ़ा को ये कहानियां फ़ंतासी लगीं, जो कि ये हैं। इस तरह संग्रह की सब कहानियों पर चर्चा हुई।
रोचक एवं सार्थक चर्चा को समेटते हुए डॉ. नेहा तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कहा कि हिंदी पाठकों को इन कहानियों का रसास्वादन करना चाहिए।
इनकी उपस्थिति रही उल्लेखनीय
फ़ेसबुक लाइव पर जमशेदपुर से डॉ. मीनू रावत, डॉ. नेहा तिवारी, अर्चना अनुपम, लखनऊ से डॉ. मंजुला मुरारी, बेंगलुरु से पत्रकार अनघा मारीषा, पुणे से सिने-समीक्षक-इतिहासकार मनमोहन चड्ढा, गोरखपुर से अनुराग रंजन, दिल्ली से रक्षा गीता, जौनपुर से अश्वनि तिवारी, झारखंड से प्रमोद कुमार बर्णवाल, देहरादून से शशिभूषण बडौनी, रामदयाल द्विवेदी आदि जुड़े। इनकी टिप्पणियों से कार्यक्रम और अधिक सफ़लता से समाप्त हुआ।

