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Maharashtra Assembly Election 2024: पांच सालों में टूटना, बिखरना, दोस्ती और अब…….

बीते पांच वर्षों में महाराष्ट्र ने राजनीति के कई रंग देखे। 3 बार सरकारें बनीं, 3 मुख्यमंत्री बने तो 3 ने उप मुख्यमंत्री का पद संभाला। इस बार मुख्य रूप से 6 पार्टियां चुनावी रेस में हैं जिनमें कई राजनीतिक दिग्गज किंगमेकर की भूमिका में नजर आ रहे हैं।

by Reeta Rai Sagar
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सेंट्रल डेस्क: Maharashtra Assembly Election 2024: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा हो चुकी है। 13 नवंबर को इस राज्य में चुनाव होंगे और 23 नवंबर को नतीजे आ जाएंगे। इस साल के विधानसभा चुनाव को बीते चुनावों के मुकाबले अलग तरीके से देखा जा रहा है। गुणा-गणित और राजनीतिक विश्लेषण किए जा रहे हैं। अब तक महाराष्ट्र में 4 मुख्य पार्टियां (बीजेपी, कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना) थी औऱ दर्जन भर छोटी-मोटी पार्टियां थी।

बीते पांच साल, खूब हुई राजनीतिक उठापटक
शिवसेना में हुए विवाद के बाद दो और मुख्य पार्टियां इस बार चुनावी मैदान में है। बीते पांच साल के दौरान महाराष्ट्र में राजनीतिक की बात करें तो यह दौर उठापटक से भरा रहा। महाराष्ट्र चुनाव ऐसे समय में हो रहा है, जब कई पार्टियां टूटी, फिर बनी। शरद पवार ने कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया।

5 साल: 3 सीएम, 3 डिप्टी सीएम देखा महाराष्ट्र ने
कांग्रेस और बीजेपी जैसी पार्टियां तो जस की तस बनी हुई है, लेकिन शिवसेना और एसीपी अब दो गुटों में बंट गए है। एनसीपी (शरद पवार) और एनसीपी (अजित पवार), शिवसेना (एकनाथ शिंदे) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे)। इस तरह मुख्य रूप से 6 पार्टियां चुनावी रेस में है। बीते पांच वर्षों में महाराष्ट्र में 3 सरकार, 3 मुख्यमंत्री और 3 उप मुख्यमंत्री बने।

तीनों सरकारों में बने रहे अजीत पवार


कई राजनीतिक उठापटक भी इन पांच सालों में हुए। जैसे ठाकरे परिवार से पहली बार उद्धव ठाकरे सीएम की कुर्सी पर बैठे और उनका बेटा आदित्य ठाकरे कैबिनेट मिनिस्टर बना। पहले सीएम की भूमिका में रहे देवेंद्र फड़नवीस को गठबंधन की सरकार में उपमुख्यमंत्री बनना पड़ा। इस बीच अजीत पवार सभी तीन सरकारों का हिस्सा रहे और डिप्टी सीएम के पद पर बने रहे।

288 सीटों वाले महाराष्ट्र में 145 है जादुई आंकड़ा


इस पूरे चुनाव में 145 की भूमिका अहम है। सरकार 145 विधायकों के बहुमत से बनना है। चूंकि चुनाव में इतनी सारी पार्टियां है, तो राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह शायद ही हो पाए कि कोई भी पार्टी अकेले सरकार बनाए। 288 सीटों वाले महाराष्ट्र विधानसभा में 2019 के मुकाबले 85 लाख नए मतदाता भी जुड़े है। चुनाव आयोग के मुताबिक इस साल 9.63 करोड़ मतदाता वोट देंगे।

महाराष्ट्र के चुनाव में दिल्ली भी मुद्दा

विगत 2019 के चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी के लिए मुद्दा सेक्युलरिज्म था औऱ बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के लिए हिंदुत्व और मराठा था। इन 5 सालों में पार्टियों की विचारधारा में काफी बदलाव दिखे है। बीजेपी-एनसीपी (अजित) सेक्युलर के साथ है, तो कांग्रेस और एनसीपी (शरद) हिंदुत्व और मराठा मानुष के साथ चुनावी मैदान में है। इन सबके अलावा मुख्य मुद्दा तोड़फोड़ और गद्दारी भी है, जिसे लेकर एनसीपी (शरद) ने एक टीजर भी जारी किया था। महाराष्ट्र के चुनाव में दिल्ली की राजनीति भी बड़ा मसला है। हाल ही में राज्यपाल ने 7 विधायकों का मनोनयन किया था। इसका इल्जाम भी विपक्ष ने केंद्र सरकार पर लगाया था।

एकनाथ शिंदे और अजीत पवार बने बागी


जब बीजेपी-शिवसेना गठबंधन टूटा, तो एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे थे। आदित्य ठाकरे ने भी उनके नाम का प्रस्ताव रखा था, सभी विधायक भी राजी थे। लेकिन तभी कांग्रेस और एनसीपी के दखल के बाद उद्धव ठाकरे ने गद्दी संभाल ली। यह बात एकनाथ शिंदे के मन में बस गई और 40 बागी विधायकों और निर्दलीय के समर्थन से 30 जून 2022 को वे महाराष्ट्र के 20वें मुख्यमंत्री बन गए। बीजेपी ने शिंदे को सीएम पद देकर स्थिरता पा ली, लेकिन तभी शरद पवार की पार्टी में उथल-पुथल शुरु हो गई और 1 जुलाई 2023 को अजीत पवार 40 विधायकों के साथ बागी हो गए। वे भी महायुति में शामिल हो गए और डिप्टी सीएम बन गए। 288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में महायुति के पास 218 सीटें थी।

मराठा आरक्षण भी बड़ा मुद्दा


मराठा आरक्षण की वजह से महाराष्ट्र के मराठा वोटर जो कि कुल आबादी का 32 प्रतिशत है, बीजेपी से नाराज चल रहे है। हाल ही में बीड में मराठाओं ने रैली कर बीजेपी के खिलाफ ही मोर्चाबंदी कर दी। मनोज जरांगे जैसे मराठा आरक्षण के नेता, जो अब तक बीजेपी और एकनाथ शिंदे के साथ थे, अब उनके विपक्ष में खड़े हो गए है। मंगलवार को जालना के अंतरवाली सराटी गांव में मीडिया को संबोधित करते हुए जरांगे ने मराठा समुदाय से अपनी ताकत दिखाने की अपील की। फड़नवीस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि फड़नवीस ने मराठा युवकों की जिंदगी बर्बाद कर दी।

मुस्लिम वोटर्स के रूख भी बदले


महाराष्ट्र में मुसलमानों का भी सियासी रूख बदल गया है। ओस्मानाबाद और औरंगाबाद (संभाजीनगर) के मुस्लिम वोटर अब उद्धव ठाकरे के समर्थन में दिख रहे है। महाराष्ट्र में 12 प्रतिशत मुस्लिम वोटर है। महाराष्ट्र के उत्तरी कोंकण, खानदेश, मराठवाड़ा, मुंबई और पश्चिमी विदर्भ में मुसलमान वोटर सियासी रुख बदल भी सकते है। पिछली बार 10 मुस्लिम विधायक चुने गए थे। जिसमें 2 एनसीपी, 2 सपा, 2 AIMIM, 3 कांग्रेस और 1 शिवसेना से थे। सपा औऱ एआईएमआईएम सरीखे दल भी महाराष्ट्र में मुस्लिम वोटरों पर दांव खेल रहे है। सपा नेता अखिलेश यादव महाराष्ट्र के मालेगांव औऱ धुले में जनसभा कर रहे है। वहां ओवैसी की गहरी पैठ है। ओवैसी की पार्टी ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। ऐसे में इस चुनाव में कई किंगमेकर दिख रहे है।

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