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Shrikrishna Janmabhoomi: श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में जन्मभूमि ट्रस्ट का अदालत में सम्पूर्ण जन्म स्थान परिसर की भूमि पर दावा 

by Rakesh Pandey
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मथुरा: मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही (Shrikrishna Janmabhoom) ईदगाह विवाद एक बार फिर चर्चा में है । इस मामले में श्रीकृष्ण जन्मभूमि (Shrikrishna Janmabhoom) ट्रस्ट ने शुक्रवार को ईदगाह सहित सम्पूर्ण जन्म स्थान परिसर की भूमि पर अपना दावा करते हुए सिविल न्यायाधीश सीनियर डिवीजन की अदालत में वाद दायर किया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की ओर से ट्रस्टी विनोद कुमार बिंदल और ओमप्रकाश सिंघल ने यह दावा पेश किया। जन्मभूमि की ओर से पेश हुए अधिवक्ता महेश चतुर्वेदी ने शुक्रवार को बताया कि अदालत ने वाद स्वीकार कर लिया है, लेकिन यह मामला भी जिला न्यायाधीश के माध्यम से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में ही सुनवाई के लिए भेज दिया जाएगा, जिससे वहां पहले से भेजी गई श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद संबंधी अन्य याचिकाओं के साथ इस मामले की भी सुनवाई की जा सके।

Shrikrishna Janmabhoomi पर ईदगाह पक्ष का आधार गलत: ट्रस्ट

ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि ईदगाह पक्ष जिस कथित समझौते का हवाला देते हुए अपने कब्जे की बात करता है, वह (श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ, जो अब श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के नाम से जाना जाता है) कभी भी इसके लिए ट्रस्ट द्वारा अधिकृत ही नहीं किया गया, उसे किसी तीसरे पक्ष से समझौता करने का अधिकार ही नहीं है।

श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ व ईदगाह कमेटी के बीच हुआ था समझौता:

गौरतलब है कि जन्मभूमि ट्रस्ट की ओर से पहली बार यह स्पष्ट किया गया है कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ को श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की ओर से मंदिर परिसर की देखरेख, साफ-सफाई, रखरखाव आदि व्यवस्थाओं के लिए जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन सेवा संघ द्वारा कथित तौर पर अनाधिकृत रूप से वर्ष 1968 में शाही ईदगाह इंतजामिया कमेटी से Shrikrishna Janmabhoomi पर काबिज रहने को लेकर समझौता कर लिया गया।

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काशी-मथुरा बाकी है: 

मंदिर-मस्जिद को लेकर दावे तो काफी समय से किए जा रहे थे लेकिन अयोध्या पर फैसले के बाद इस तरह के दावों को हवा मिलनी शुरू हो गयी है । जब से अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के पक्ष में फैसला आया है, उसके बाद से ही काशी और मथुरा को लेकर आवाज उठनी तेज हो गयी है। यहां तक कहा गया कि ‘अयोध्या तो झांकी है, काशी मथुरा बाकी है’, इस नारे को बार-बार दोहराया जाता है। काशी में ज्ञानवापी को लेकर याचिका दायर की गई जिसके बाद वहां सर्वे का कार्य चल रहा है। वहीं अब मथुरा में भी हलचल तेज हुई। ऐसे में देखना होगा की मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में आगे क्या होता है।

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