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एक बच्चे की वजह से चली गयी मेयर की कुर्सी : बिहार के छपरा में सामने आया मामला,अब हाईकोर्ट पर निगाहें

by Rakesh Pandey
Bihar Chhapra Mayor, Mayor's chair lost because of a child Bihar's Chhapra
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स्टेट डेस्क/ पटना : अब तक आपने घपले, घोटाले और अदालत की सजा की वजह से जनप्रतिनिधियों की कुर्सी जाने की कहानी सुनी होगी। बिहार के छपरा में कुछ नया हुआ है। छपरा नगर निगम के निर्वाचित मेयर राखी गुप्ता की कुर्सी एक बच्चे की वजह से चली गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने उन्हें पद से विमुक्त कर दिया है। राखी गुप्ता के खिलाफ पूर्व मेयर सुनीता देवी की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद यह आदेश जारी हुआ है।

आखिर कहां और क्यों फंस गईं राखी गुप्ता
दिसंबर 2022 में चुनाव जीतकर मेयर बनने वाली राखी गुप्ता नामांकन के समय दाखिल किए गए हलफनामे में की वजह से फंस गईं हैं। चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपने दो बच्चियों के होने का जिक्र किया था। वहीं रजिस्ट्री कार्यालय की ओर से निकाले गए दस्तावेज में उनकी दो बच्चियों और 1 बच्चे का नाम सामने आया।

राखी गुप्ता का तर्क था कि उन्होंने अपने एक बच्चे को अपने नि:संतान रिश्तेदार को गोद दे दिया है। ऐसे में उनकी दो ही बेटियां हैं। चुनाव आयोग इस तर्क से सहमत नहीं हुआ।

किन प्रावधानों के तहत की गई राखी गुप्ता पर कार्रवाई

बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 के तहत में प्रावधान के अनुसार मेयर पद पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार के लिए अधिकतम 2 बच्चे होने का ही प्रावधान है। दस्तावेज के आधार पर की गई शिकायत में साबित हो गया कि राखी गुप्ता 3 बच्चों की जैविक माता है। लिहाजा राज्य निर्वाचन आयोग ने उन्हें मेयर पद के अयोग्य घोषित कर दिया।

राखी गुप्ता ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
राज्य निर्वाचन आयोग के फैसले के खिलाफ राखी गुप्ता ने पटना हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इसमें उन्होंने तर्क दिया है कि गोदनामे के बाद के बाद कोई भी जैविक माता-पिता अपने बच्चे पर कानूनी अधिकार होने का दावा नहीं कर सकते। ऐसे में तीसरे बच्चे को उनका बच्चा मान कर की गई राज्य निर्वाचन आयोग की कार्रवाई गलत है। हाई कोर्ट से मांग की गई है कि वह राज्य निर्वाचन आयोग के फैसले को रद्द करें। अब देखना होगा कि कोर्ट इस मामले में क्या फैसला सुनाता है।

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