चाईबासा : गत वर्ष की चैंपियन टीम मिडिलसेक्स क्रिकेट क्लब चाईबासा ने आज खेले गए 10वीं अशोक कुमार जैन जिला नॉक आउट क्रिकेट प्रतियोगिता के फाइनल मैच में इतिहास रचते हुए सेरसा चक्रधरपुर को पांच विकेट से पराजित कर न सिर्फ चैंपियन होने का गौरव प्राप्त किया बल्कि विजेता ट्राफी भी अपने पास बरकरार रखी।

पश्चिमी सिंहभूम जिला क्रिकेट के इतिहास में ये पहला अवसर है जब कोई टीम फाइनल में 300 से अधिक रन का पीछा करते हुए विजेता बनी है।
पश्चिमी सिंहभूम जिला क्रिकेट संघ के तत्वावधान में चाईबासा के बिरसा मुंडा क्रिकेट स्टेडियम मैदान पर खेले गए आज के मैच में टॉस एमसीसी चाईबासा के कप्तान अनुराग संजय पूर्ति ने जीता तथा विपक्षी टीम सेरसा चक्रधरपुर को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। हालांकि, रनों से भरे विकेट पर उनका ये फैसला चौंकाने वाला था। परंतु कप्तान को अपने गेंदबाजों से ज्यादा बल्लेबाजों पर भरोसा था, जिसे उनके बल्लेबाजों ने सच साबित कर दिखाया।
टास हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए सेरसा चक्रधरपुर की टीम ने निर्धारित पैंतीस ओवर में आठ विकेट के नुकसान पर 327 रनों का पहाड़ सा स्कोर खड़ा किया, जो अब तक फाइनल में किसी भी टीम के द्वारा बनाया गया सर्वाधिक स्कोर है। सेरसा की ओर से तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए सत्यम त्रिपाठी ने शानदार बल्लेबाजी का परिचय देते हुए बारह चौके एवं सात छक्के की मदद से 117 रनों की शतकीय पारी खेली। अन्य बल्लेबाजों में गौतम सुना ने 50, ज्ञान रंजन नायक ने 29, डेविड सांगा ने 25 तथा पिछले मैच के शतकवीर दीपक यादव ने 23 रनों का योगदान दिया। मिडिलसेक्स क्रिकेट क्लब चाईबासा की ओर से आदित्य पुष्कर थोड़े मंहगे जरूर साबित हुए पर उन्होंने चार विकेट हासिल करने में सफलता पाई। विशाल सिंह ने दो तथा रौशन कुमार एवं ललित सिंह ने एक-एक विकेट अपने नाम किए।
जीत के लिए 328 रनों के पहाड़ सा स्कोर का पीछा करने उतरी एमसीसी की टीम ने 32.3 ओवर में पांच विकेट के नुकसान पर 328 रन बनाकर इतिहास रच दिया। हालांकि, 72 रन के स्कोर पर पहले शिवम कुमार (23 रन) एवं इसी स्कोर पर जयप्रकाश राजपूत (0 रन) के आउट होने के बाद ऐसा लग रहा था मानों सेरसा की टीम बड़ी आसानी से ये मैच अपने नाम कर लेगी। सेरसा की स्थिति उस समय और मजबूत हो गई जब एमसीसी के चार शीर्ष के बल्लेबाज 139 रन के स्कोर पर पैवेलियन लौट गए।
अनुराग संजय ने खोली बेहतरीन पारी
परंतु यहीं से कप्तान अनुराग संजय एवं ललित सिंह ने मोर्चा संभाला और विपक्षी गेंदबाजों का डट कर मुकाबला करते हुए पांचवें विकेट के लिए 148 रनों की बेहतरीन साझेदारी निभाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। पांचवें विकेट के रूप में 287 रन के स्कोर पर जब कप्तान अनुराग संजय का विकेट गिरा तब तक जीत की पटकथा लिखी जा चुकी थी। अनुराग ने कप्तान की भूमिका निभाते हुए सात चौके एवं तीन छक्के की सहायता से 75 रनों की बेहतरीन पारी खेली। अनुराग संजय के आउट होने के बाद ललित सिंह एवं रौशन कुमार ने छठे विकेट के लिए नाबाद 41 रनों की साझेदारी निभाकर टीम को जीत दिला दी। ललित सिंह ने जिम्मेदारी भरी पारी खेली और छः चौके तथा पांच छक्के की सहायता से नाबाद 88 रन बनाए। जबकि, रौशन कुमार 29 रन बनाकर नाबाद रहा।
मैच समाप्ति के बाद आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में पश्चिमी सिंहभूम के जिला खेल पदाधिकारी मारकस हेंब्रम ने विजेता एवं उपविजेता टीम को ट्राफी के साथ-साथ व्यक्तिगत पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
ललित सिंह बने प्लेयर ऑफ द फाइनल
फाइनल मैच में शानदार प्रदर्शन करने के लिए एमसीसी चाईबासा के ललित सिंह को प्लेयर ऑफ द फाइनल के पुरस्कार से नवाजा गया। पूरी प्रतियोगिता में बेहतरीन बल्लेबाजी करने के लिए सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज एवं मैन आफ द सीरीज का खिताब एमसीसी चाईबासा के कुमार करण ( 4 मैच में 266 रन) को तथा सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ का पुरस्कार एमसीसी के ही आदित्य पुष्कर (4 मैच में 13 विकेट) को दिया गया। जिला क्रिकेट संघ ने पूरे प्रतियोगिता में अंपायरिंग एवं स्कोरिंग की भूमिका निभाने वाले सभी अंपायरों एवं स्कोररों को भी सम्मानित किया। इसके आलावा, बेहतरीन आउटफील्ड एवं शानदार विकेट तैयार करने वाले दोनों ग्राउंड्समैन शिवा लामा एवं पिंटु सामड को भी सम्मानित किया गया।
पुरस्कार वितरण समारोह में मंच का संचालन जिला क्रिकेट संघ के कोषाध्यक्ष सुप्रियो फौजदार ने जबकि धन्यवाद ज्ञापन जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष मुकुंद रुंगटा ने की।

