MGNREGA Scam Jharkhand : जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले (East Singhbhum corruption) के धालभूमगढ़ प्रखंड अंतर्गत नरसिंहगढ़ पंचायत के चारचक्का ग्राम में मनरेगा योजना के तहत हुई गड़बड़ी को लेकर ग्रामीण विकास विभाग ने गंभीर टिप्पणियों के साथ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। विभागीय जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि सिंचाई नाला निर्माण योजना में बिना कार्य कराए रु 3,61,943 की फर्जी निकासी की गई।


यह मामला मुड़ाकाटी सीमा प्रारंभ पुलिया से अशोक महतो की भूमि की ओर सिंचाई नाला निर्माण से जुड़ा है, जिसकी प्राक्कलित लागत ₹4,80,500 थी। जिला पंचायती राज पदाधिकारी, पूर्वी सिंहभूम द्वारा 24 अगस्त 2022 को की गई स्थल जांच में पाया गया कि योजना स्थल पर कोई निर्माण कार्य मौजूद नहीं था, जबकि भुगतान पहले ही कर लिया गया था।
मुखिया के डोंगल से 81 ट्रांजेक्शन, जांच के आदेश
ग्रामीण विकास विभाग ने मुखिया द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निर्देश दिया है कि उनके डिजिटल सिग्नेचर (डोंगल) से किए गए 81 ट्रांजेक्शन की विधि-सम्मत जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि योजना से संबंधित अभिलेखों का प्रभार वर्तमान एवं तत्कालीन पंचायत सचिव को क्यों नहीं सौंपा गया।

BDO BPO Inquiry : BDO और BPO पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी
तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), धालभूमगढ़ एवं तत्कालीन प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (BPO) के स्पष्टीकरण को विभाग ने पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। विभाग ने निर्देश दिया है कि दोनों अधिकारियों से यह स्पष्टिकरण लिया जाए कि क्यों न उन्हें बिना कार्य कराए की गई फर्जी निकासी के लिए जिम्मेदार मानते हुए आरोप पत्र (प्रपत्र ‘क’) गठित कर विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए। BPO के मामले में सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई पर विचार के निर्देश दिए गए हैं।

इंजीनियरों की भूमिका पर सवाल
हालांकि सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता के स्पष्टीकरण को स्वीकार किया गया है, लेकिन विभाग ने यह टिप्पणी भी की है कि बिना तकनीकी स्वीकृति, मापी और सत्यापन के इतनी बड़ी राशि की निकासी गंभीर लापरवाही और राजकोष के दुरुपयोग का संकेत है। विभाग ने पूछा है कि जब गड़बड़ी प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर हुई, तो कार्रवाई सिर्फ निचले स्तर तक ही सीमित क्यों रखी गई।
MGNREGA Fraud Case : कंप्यूटर ऑपरेटर और ग्राम रोजगार सेवक भी कटघरे में
प्रखंड कार्यालय, धालभूमगढ़ के कंप्यूटर ऑपरेटर से यह स्पष्टीकरण मांगा गया है कि गलत जियो-टैगिंग किसके आदेश पर स्वीकार की गई। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या उनके कंप्यूटर सिस्टम से पंचायत की लॉगिन आईडी, पासवर्ड और डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग नहीं होता है।

