नई दिल्ली: देश की सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में आज एक बड़ा अभ्यास होने जा रहा है। भारत के 295 जिलों में आज शाम को एक साथ मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है, जिसमें नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस अभ्यास का उद्देश्य सिविल डिफेंस सिस्टम को सक्रिय बनाना और आम लोगों को संकट की घड़ी में सही कदम उठाने के लिए प्रशिक्षित करना है।

दिल्ली में दो चरणों में होगा अभ्यास
दिल्ली में यह मॉक ड्रिल दो भागों में होगी। पहला अभ्यास शाम 4 बजे होगा, जिसमें हवाई हमले की स्थिति को दर्शाया जाएगा। इस दौरान सायरन बजाकर नागरिकों को सतर्क किया जाएगा और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश मिलेगा।
दूसरा अभ्यास शाम 7 बजे के बाद होगा, जिसमें ब्लैकआउट यानी बिजली की सभी लाइटें बंद कर दी जाएंगी। इस दौरान लोगों को अंधेरे में रहकर आपातकालीन स्थितियों से निपटने का अभ्यास कराया जाएगा।
क्या होंगे सायरन के संकेत?
- लंबा सायरन: खतरे की स्थिति का संकेत।
- छोटा सायरन: खतरा समाप्त होने का संकेत।
लोगों को पहले से अपने नज़दीकी सुरक्षित स्थानों की पहचान करनी चाहिए। इसके साथ ही एक इमरजेंसी किट तैयार रखनी जरूरी है, जिसमें टॉर्च, पेयजल, सूखा भोजन, दवाइयां और प्राथमिक उपचार सामग्री हो।
ड्रिल के दौरान क्या करें?
- बाहरी गतिविधियां तुरंत रोक दें।
- पास के किसी सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।
- मोबाइल या इंटरनेट का इस्तेमाल केवल आवश्यक स्थिति में करें।
- अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के निर्देशों का पालन करें।
क्या न करें?
- सायरन को नजरअंदाज़ न करें।
- घबराएं नहीं और अफवाहें न फैलाएं।
- बच्चों को अकेला न छोड़ें।
ब्लैकआउट की तैयारी कैसे करें?
- खिड़कियों को मोटे पर्दों या गहरे रंग के कपड़े से ढकें।
- सभी लाइटें बंद रखें या ढकी हुई रखें।
- टॉर्च और मोमबत्तियों को ऐसे स्थान पर रखें जहां बाहर से रोशनी न दिखे।
- बाहर निकलने से बचें जब तक निर्देश न मिले।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सुझाव
- बच्चों को सिखाएं कि संकट की स्थिति में क्या करना है।
- परिवार के बुजुर्ग सदस्यों को मॉक ड्रिल की जानकारी पहले से दें।
- घर, स्कूल और कार्यालयों में सुरक्षित स्थानों की पहचान करें।
- प्राथमिक चिकित्सा की जानकारी हर सदस्य को दें।
सरकार की अपील: सहयोग करें, जागरूक बनें
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस मॉक ड्रिल को गंभीरता से लें और अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय रूप से भाग लें। यह अभ्यास किसी युद्ध की स्थिति नहीं बल्कि एक रक्षा तैयारी है, जिससे प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

