नई दिल्ली : आखिरकार कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव ला दिया है। बुधवार को कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को दिया। जिसे लोकसभा स्पीकर ने मंजूर कर लिया। हालांकि इस अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और वोटिंग कब होगी इसकी तिथि अभी तय नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि अगले सप्ताह की तिथि तय की जाएगी।

विदित हो कि मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा के मुद्दे पर विपक्ष लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में बयान की मांग कर रहा है। मानसून सत्र की शुरुआत होने के साथ ही संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के हंगामे के चलते कार्यवाही बाधित रही है। वहीं इस नोटिस पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सभी पार्टियों से विमर्श के बाद ही इस पर चर्चा की तिथि तय होगी।
यह मोदी सरकार के खिलाफ दूसरा अविश्वास प्रस्ताव :
अगर केंद्र के नरेंद्र मोदी सरकार की बात करें तो यह पहली बार नहीं है, जब मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने जा रही हो। इससे पहले जुलाई 2018 में भी केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया था। इस अविश्वास प्रस्ताव पर 11 घंटे चली बहस के बाद वोटिंग हुई थी। इस दौरान मोदी सरकार ने आसानी से बहुमत हासिल कर लिया था।
जानिए क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव :
अब जब विपक्ष मोदी सरकार के खिलाफ आज लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने जा रही है तो हम आपको अविश्वास प्रस्ताव के बारे में बताते हैं। संविधान विशेषज्ञ डॉ राजेंद्र भारती बताते हैं कि जब विपक्ष को यह लगता है कि वर्तमान सरकार लोकसभा में अल्पमत में है या फिर सरकार सदन का विश्वास खो चुकी है, तो ऐसी स्थिति में अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है।
जिसे अंग्रेजी में नो कॉन्फिडेंस मोशन कहते हैं। संविधान में आर्टिकल-75 में इसका उल्लेख किया गया है। आर्टिकल-75 के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति जवाबदेह है। ऐसे में अगर अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार लोकसभा में बहुमत नहीं साबित कर पाती है, तो प्रधानमंत्री समेत पूरे मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है।
विपक्ष की हार तय फिर भी क्यों ला रहा अविश्वास प्रस्ताव?
वहीं इस अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सवाल उठता है कि जब विपक्ष को पता है कि संख्याबल के हिसाब से उसकी हार निश्चित है तो वह अविश्वास प्रस्ताव क्यों ला रहा है। इस संबंध मे विपक्षी दलों की दलील है कि वे चर्चा के दौरान मणिपुर मुद्दे पर सरकर को घेरेंगे। वहीं इस मुद्दे पर अब तक बोलने से बच रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद में बोलने के लिए विवश किया जा सकेगा।
जहां सरकार इस बात पर जोर दे रही है कि मणिपुर की स्थिति पर चर्चा का जवाब केवल केंद्रीय गृह मंत्री देंगे। वहीं विपक्षी पार्टियों का साफ-साफ कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में मणिपुर पर जवाब दें। वे इस अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पीएम मोदी को संसद में भी लाना चाह रहे हैं। हालांकि जानकार यह मान रहे हैं कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान पीएम मणिपुर हिंसा पर कुछ बोलें, यह जरूरी नहीं है। ऐसे में देखना होगा की आगे क्या होता है।
संख्याबल में कही आगे हैं मोदी सरकार :
अगर आंकड़ों की बात करें, तो अभी लोकसभा में NDA के 335 सांसद हैं। जो बहुमत के आंकड़े 272 से कही अधिक हैं। विपक्षी खेमे के गठबंधन INDIA के पास सिर्फ 150 सांसद हैं। मोदी सरकार के खिलाफ पहला अविश्वास प्रस्ताव 20 जुलाई 2018 में आया। तब सरकार को 325, विपक्ष को 126 वोट मिले थे।

