नई दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला की एक याचिका (Omar Abdullah Divorce Plea) को खारिज कर दिया है। इसके जरिए उमर ने अपने से अलग रह रही पत्नी पायल से तलाक मांगे जाने की अर्जी दायर की थी। इसको लेकर हाईकोर्ट ने कहा कि उनकी अपील में कोई योग्यता नहीं है। अब्दुल्ला ने उच्च न्यायालय का रुख किया था, जहां उन्होंने बताया कि उनकी शादी पूरी तरह से टूट गई है। उन्होंने कहा कि उनकी और पायल अब्दुल्ला की शादी सितंबर 1994 में हुई थी, लेकिन वे 2009 से अलग रह रहे हैं।

Omar Abdullah Divorce Plea: अदालत का फैसला बरकरार
न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें अब्दुल्ला को तलाक देने से इनकार कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के 2016 के फैसले को चुनौती देने वाली जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा दायर अपील में कोई दम नहीं है।
पायल अब्दुल्ला पर प्रताड़ित करने का आरोप

उमर अब्दुल्ला ने पायल अब्दुल्ला पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। इसके पहले ट्रायल कोर्ट ने भी उमर अब्दुल्ला की तलाक की अर्जी (Omar Abdullah Divorce Plea) 30 अगस्त, 2016 को खारिज कर दी थी। ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ उमर अब्दुल्ला ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उमर ने पायल पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि वे इन आरोपों को सही साबित नहीं कर पा रहे हैं।
सबूत देने में असफल रहे उमर अब्दुल्ला
उमर अब्दुल्ला को तलाक देने से इनकार करते हुए पीठ ने कहा कि उसे पारिवारिक अदालत के आदेश में कोई खामी नहीं मिली जिसने उन्हें तलाक देने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने पारिवारिक अदालत के आदेश से सहमति जताते हुए कहा कि उमर अब्दुल्ला द्वारा पायल अब्दुल्ला के खिलाफ क्रूरता के आरोप अस्पष्ट थे। इतना ही नहीं, उमर अब्दुल्ला चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक, पायल अब्दुल्ला द्वारा क्रूरता के किसी भी कृत्य को साबित करने में असफल रहे हैं।
गुजारा भत्ता देने की मांग
हाई कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला को आदेश दिया था कि वो अपनी पत्नी पायल अब्दुल्ला को बतौर अंतरिम गुजारा भत्ता डेढ़ लाख रुपए हर महीने दें। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने उमर को निर्देश दिया था कि वो अपने बेटे की पढ़ाई के लिए हर महीने 60 हजार रुपए दें। सुनवाई के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि जिस गुजारा भत्ते की मांग की गई है, वो स्वीकार करने योग्य नहीं है। उमर की इस दलील का पायल अब्दुल्ला के वकील ने पुरजोर विरोध किया था और कहा था कि 2016 से पायल अकेले रह रही हैं और उन्हें कोई खर्च नहीं दिया जा रहा है।
यहां तक कि उनके पास अपने बेटों की फीस तक भरने के पैसे नहीं हैं। उमर ने कहा था कि पायल अपना गुजारा कर सकती हैं, क्योंकि उनका अपना व्यवसाय है और दिल्ली में उनका एक घर भी है। बेटे भी अब बड़े हो गए हैं, जो गुजारा भत्ता नहीं मांग सकते हैं। हालांकि, कोर्ट के आदेश को पूरा करते हुए उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा था कि वे बच्चों के पालन-पोषण का अपना कर्तव्य निभा रहे हैं, मगर फिर भी उनकी पत्नी लगातार अपनी वास्तविक वित्तीय स्थिति को गलत बता रही हैं।
1994 में हुई थी दोनों की लव मैरिज
पायल सिख परिवार से आती हैं। उनके पिता मेजर जनरल रामनाथ सेना से रिटायर्ड हुए थे। पायल और उमर की पहली मुलाकात दिल्ली की ओबेरॉय होटल में हुई थी, जहां दोनों साथ में काम करते थे। साल 1994 में उनकी लव मैरिज हुई थी। उनके दो बेटे जाहिर और जमीर हैं। पिछले दिनों उमर अब्दुल्ला ने बताया था कि वे और उनकी पत्नी पायल अलग हैं। उमर और पायल की शादी 01 सितंबर 1994 को हुई थी।
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