नई दिल्ली। हिंदू विवाह पद्धति में सिंदूर विवाह बंधन का प्रतीक है, लेकिन क्या जबरदस्ती किसी की मांग में सिंदूर भर देने से शादी हो जाती है, क्या वह शादी जायज है? हाल ही में पटना हाईकोर्ट ने एक ऐसे मामले में एक स्पष्ट निर्णय दिया, जिसमें यह तय होता है कि क्या सिंदूर दान स्वैच्छिक है या फिर यह जबरदस्ती के तौर पर किया गया है। इस मुद्दे पर हुए न्यायिक टिप्पणी ने हिंदू विवाह सिस्टम में एक नई दिशा को प्रेरित किया है, जिससे सामाजिक और कानूनी माध्यमों में बदलाव का संकेत है।

क्या है पूरा मामला?
पटना हाईकोर्ट ने 10 नवंबर को एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया, जिसमें रविकांत के समर्थन में एक अपहरण मामले पर फैसला किया गया। याची रविकांत, जो सेना में तैनात थे, ने बताया कि 10 साल पहले उनका अपहरण लखीसराय जिले में हुआ था और उनकी बंदूक की नोक पर जबरदस्ती शादी कराई गई थी।
हाईकोर्ट ने याची की दलील को मान्यता दी और उत्तराधिकारी फैसले में स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह एक्ट के अनुसार शादी को पूर्ण माना जाएगा जब सप्तपदी हों। इसका मतलब है कि सप्तपदी की अनदेखी से शादी को वैध नहीं माना जाएगा।
मामले में 30 जून 2013 को याची और उसके चाचा का कुछ लोगों ने अपहरण किया था, जब वे लखीसराय के एक मंदिर में थे। पुलिस की अनदेखी के बाद रविकांत ने लखीसराय की सीजेएम कोर्ट में शिकायत की, जो 27 जनवरी 2020 को अपील खारिज हो गई। निचली अदालत से मिली राहत नहीं मिलने पर उन्होंने पटना हाईकोर्ट की ओर मोड़ा।
सिंदूर भरना स्वैच्छिक
न्यायिक टिप्पणी हिंदू विवाह अधिनियम में हुई एक घटना के माध्यम से साबित हुआ कि सिंदूर दान की प्रक्रिया स्वैच्छिक है। जस्टिस पी बी बजंथरी और अरुण कुमार झा ने यह रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि जबरन सिंदूर नहीं भर सकते, और ऐसा करने वाली शादी वैध नहीं मानी जा सकती।
न्यायिक ग़लतियों का समाधान
दो न्यायिकों की बेंच ने फैसले में ग़लतियों की बात की, कहते हुए कि शादी का सम्पन्न होना हिंदू विवाह पद्धति में सप्तपदी का विधान है, जिसके बाद ही सिंदूरदान होता है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया को नजरंदाज करना वैधता को हानि पहुंचा सकता है।
मामले का सुधार
इस मामले में जिसमें रविकांत की जबरदस्ती शादी कराई गई, हाईकोर्ट ने यह तय किया कि हिंदू विवाह एक्ट के मुताबिक सप्तपदी होना अनिवार्य है। यह निर्णय दिखाता है कि न्यायिक तंत्र ने इस मामले में सुधार करने का संकेत दिया है।
याची रविकांत का कहना
रविकांत ने बताया कि उसका अपहरण 10 साल पहले हुआ था, और उसे जबरदस्ती बंदूक की नोक पर शादी कराई गई थी। उसका कहना है कि यह फैसला उसके समर्थन में एक बड़ी जीत है, जो इस मुद्दे की जागरूकता में एक महत्वपूर्ण कदम है।
न्यायिक संज्ञान
हाईकोर्ट ने यह भी संज्ञान दिलाया कि पंडित की गवाही के बावजूद शादी की विधि विधान की जानकारी नहीं थी, जो एक गंभीर समस्या है। इससे यह साबित होता है कि मुद्दे को सही से सुनने में कुछ कमी थी।
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