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पितृपक्ष का हुआ समापन, नदी घाटों पर लोगों ने किया तर्पण

by Rakesh Pandey
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कोलकाता: आज सर्व पितृ अमावस्या मनाई जा रही है। इसे पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहते हैं। पितृ पक्ष में अमावस्या तिथि नाराज पितरों को खुश करने का अंतिम दिन होता है क्योंकि पितृ पक्ष में धरती पर आये पितर वापस पितृ लोक जाते हैं। जो लोग किसी कारणवश अपने पितरों का श्राद्ध नहीं कर पाये हैं, वो आज सर्व पितृ अमावस्या के दिन सभी पितरों का श्राद्ध कर्म किया। वहीं इस मौके पर पश्चिम बंगाल में लाखों लोगों ने महालय के अवसर पर ‘तर्पण’ किया। महालय इसका प्रतीक होता है कि दुर्गा पूजा नजदीक आ गया है। इस विशेष दिन लोग हुगली और राज्य की अन्य नदियों एवं जलाशयों के तटों पर पहुंचे और अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया। दिन की शुरुआत आकाशवाणी पर सुबह में महिषासुर मर्दिनी (देवी दुर्गा को समर्पित श्लोकों और गीतों के संग्रह) के प्रसारण से हुई। महिषासुर मर्दिनी का पहली बार सीधा प्रसारण 1930 के दशक की शुरुआत में आकाशवाणी पर किया गया था। तब से इसका प्रसारण महालय की सुबह करने का चलन बन गया है।

हुगली के विभिन्न घाटों पर कड़ी निगरानी :

अधिकारियों ने बताया कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस ने हुगली के विभिन्न घाटों पर कड़ी निगरानी रखी। अधिकारियों ने बताया कि कोलकाता के जिन 18 घाटों पर श्रद्धालु तर्पण कर रहे हैं, वहां सुरक्षा के पर्याप्त उपाय किए गए हैं। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने आज सुबह पूर्वी मेदिनीपुर जिले स्थित अपने गृहनगर कांथी में एक शोभायात्रा का नेतृत्व किया।

महालय से मां की पूजा शुरू

महालय के मौके पर कांग्रेस ने भी शुभकामनाएं दी। कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “मां दुर्गा आप सभी को शांति और समृद्धि का आशार्वाद दें और हमारे जीवन में प्रेम और सद्भाव आए। दुर्गा पूजा की शुरुआत 20 अक्टूबर यानी षष्ठी से होगी और इसका समापन 24 अक्टूबर यानी दशमी को होगा।

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