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सरकार का सख्त रुख के बाद गूगल ने प्ले स्टोर पर भारतीय ऐप बहाल किया, जानिए क्या है पूरा मामला

by Rakesh Pandey
Play store apps
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नई दिल्ली: गूगल के अपने प्ले स्टोर से कुछ ऐप हटाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार ने (Play store apps) शनिवार को कहा कि भारतीय ऐप को हटाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। सरकार ने इस संबंध में गूगल और संबंधित स्टार्टअप को बैठक के लिए अगले सप्ताह बुलाया है। आईटी और दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की कुंजी है और उनके भाग्य का फैसला किसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनी पर नहीं छोड़ा जा सकता है।

Google ने क्यों की कार्रवाई?

गूगल ने अपने प्ले स्टोर का इस्तेमाल करने की पॉलिसी में बदलाव किए थे। इसके चलते गूगल ने सर्विस चार्जेस को 11 फीसदी से बढ़ा कर 26 फीसदी कर दिया था। इसके बाद गूगल ने सर्विस चार्ज न देने वाली कंपनियों पर एक्शन के तहत उन्हें प्ले स्टोर से हटाने का फैसला लिया था। इससे पहले देश की एंटीट्रस्ट अथॉरिटी ने पुराना सिस्टम खत्म करने का आदेश दिया था।

एसोसिएशन ने ऐप्स की डीलिस्टिंग को अनुचित बताया

आईएएमएआई ने कहा, ”एसोसिएशन की गवर्निंग काउंसिल ने ऐप्स की डीलिस्टिंग को अनुचित बताया है। इन्फो एज के संस्थापक संजीव बिखचंदानी ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया कि भारतीय कंपनियां अभी इसका अनुपालन करेंगी। लेकिन, भारत को एक ऐप स्टोर/प्ले स्टोर की जरूरत है, जो यूपीआई और ओएनडीसी जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा हो। प्रतिक्रिया रणनीतिक होनी चाहिए।

सरकार ने क्या कहा (Play store apps)

यह कदम गूगल द्वारा उन 10 डेवलपर्स के खिलाफ कार्रवाई करने की योजना की घोषणा के बाद आया है, जिन्होंने अन्य ऐप स्टोर की भुगतान नीति का पालन करने से इनकार कर दिया था। एएलटीटी, स्टेज और अहा स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म, ट्रूली मैडली और क्वैक क्वैक डेटिंग ऐप्स, कुकू एफएम ऑडियो कंटेंट प्लेटफॉर्म और एफआरएनडी सोशल नेटवर्किंग ऐप जैसी कंपनियों के एप्लिकेशन को भी गूगल द्वारा हटा दिया गया था।

सरकार ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। वैष्णव ने कहा कि गूगल को भारतीय ऐप को हटाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। वैष्णव ने कहा, ‘भारत सरकार की नीति बहुत स्पष्ट है। हमारे स्टार्टअप को वह सुरक्षा मिलेगी, जिसकी उन्हें जरूरत है।’

अगले सप्ताह करेंगे मुलाकात

उन्होंने कहा कि सरकार विवाद सुलझाने के लिए अगले सप्ताह गूगल और प्ले स्टोर से हटाए गए ऐप के डेवलपर से मुलाकात करेगी। वैष्णव ने कहा, ‘मैंने पहले ही गूगल से बात की है। मैंने उन ऐप डेवलपर से भी बात की है, जिन्हें हटाया गया है। हम उनसे अगले हफ्ते मिलेंगे। इस तरह ऐप को हटाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।’

उन्होंने कहा कि भारत ने 10 वर्षों में एक लाख से अधिक स्टार्टअप और 100 से अधिक यूनिकॉर्न का एक मजबूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बनाया है। मंत्री ने कहा, ‘युवाओं और उद्यमियों की ऊर्जा को सही दिशा देनी चाहिए और इसे बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनी की नीतियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।’

गूगल की बिलिंग नीति का पालन

गूगल ने शुक्रवार को बिल विवाद के चलते भारतीय टेक कंपनी इन्फो एज के नौकरी डॉट कॉम, 99 एकड़, जीवनसाथी और शिक्षा एप के साथ ही कूकू एफएम, भारत मैट्रिमोनी, ट्रूली मैडली, क्वैक-क्वैक, स्टेज और ऑल्टटी को हटा दिया था। इंफो एज के फाउंडर संजीव बिखचंदानी ने बताया कि उनके एप 9 फरवरी से गूगल की बिलिंग नीति का पालन कर रहे हैं। इसके बाद भी मनमाने तरीके से उनके एप को प्ले स्टोर से हटाया गया।

19 मार्च को होगी अगली सुनवाई

भारतीय कंपनियों और गूगल के बीच एप भुगतान पर शुल्क को लेकर विवाद है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने गूगल को आदेश दिया था कि वह 15 से 30 फीसदी शुल्क लगाने की पुरानी व्यवस्था को खत्म करे, जिसके बाद गूगल ने ऐप भुगतान पर 11-26 प्रतिशत शुल्क लगाना शुरू कर दिया। भारतीय कंपनियों ने गूगल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें गूगल के शुल्क पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई। इस मामले में अगली सुनवाई 19 मार्च को होनी है।

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