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पीएम मोदी ने भरी तेजस में उड़ान, बोले-हम आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में विश्व में किसी से कम नहीं

by Rakesh Pandey
पीएम मोदी ने भरी तेजस में उड़ान
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बेंगलुरु: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को बेंगलुरु में तेजस फाइटर प्लेन में उड़ान भरी। यह किसी भी प्रधानमंत्री का तेजस में पहली उड़ान था। तेजस में उड़ान भरने से पहले मोदी बेंगलुरु स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) भी पहुंचे थे। वहीं, अपने सफल उड़ान के बाद पीएम ने कहा, तेजस में सफलतापूर्वक सफर की। ये गजब का अनुभव रहा। इस उड़ान से मेरे अंदर देश की स्वदेशी क्षमताओं पर भरोसा और बढ़ गया है।

उन्होंने आगे एक्स पर लिखा-मैं आज तेजस में उड़ान भरते हुए अत्यंत गर्व के साथ कह सकता हूं कि हमारी मेहनत और लगन के कारण हम आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में विश्व में किसी से कम नहीं हैं। भारतीय वायुसेना, डीआरडीओ और एचएएल के साथ ही समस्त भारतवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। गौरतलब है कि तेजस को एचएएल ने डेवलप किया है। यह सिंगल इंजन वाला हल्का लड़ाकू विमान है। वायुसेना में इसकी दो स्क्वॉड्रन शामिल हो चुकी हैं। मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने एचएएल का दौरा कर उसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में चल रहे काम की समीक्षा भी की।

केंद्र सरकार ने 36 हजार 468 करोड़ का दिया ऑर्डर :
मोदी सरकार के दौरान 83 लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट एमके 1ए तेजस जेट्स की डिलीवरी के लिए 36 हजार 468 करोड़ का ऑर्डर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को दिया गया। इनकी डिलीवरी फरवरी 2024 तक शुरू होगी। पीएमओ के मुताबिक, उन्होंने तेजस की मैन्युफैक्चरिंग हब का निरीक्षण किया. इससे पहले सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा था कि ‘प्रधानमंत्री एचएएल की विनिर्माण सुविधा की समीक्षा करेंगे और दौरा करेंगे, जिसमें तेजस जेट की सुविधा भी शामिल है।

अब एलसीए के इंजन देश में ही बनेंगे
हल्के लड़ाकू विमान एलसीए मार्क 2 (तेजस एमके 2) और स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) की पहली दो स्क्वॉड्रन के इंजन अब देश में ही बनेंगे। भारत में रक्षा क्षेत्र को मजबूती देने के लिए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से बताया गया कि अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) मिलकर ये इंजन बनाएंगी। अमेरिका से इसकी सभी मंजूरी मिल गई है।

इंडोनेशिया समेत कई देश तेजस खरीदने के हैं इच्छुक
तेजस विमान की बात करें, तो इसे खरीदने में कई देशों ने रुचि दिखाई है और अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) एयरोस्पेस ने प्रधानमंत्री की हालिया अमेरिका यात्रा के दौरान एमके-टू-तेजस के लिए संयुक्त रूप से इंजन बनाने को लेकर एचएएल के साथ एक समझौता किया था। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस साल अप्रैल में कहा था कि 2022-2023 में भारत का रक्षा निर्यात 15,920 करोड़ रुपये के अबतक के सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गया है। ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और फिलीपींस समेत छह देशों ने भारत के हल्के लड़ाकू विमान तेजस को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है।

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने दिया था तेजस नाम
तेजस की बात करें, तो इसका यह नाम साल 2003 में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने दिया था। जबकि, साल 2016 को यह विमान को सेवा में शामिल हुआ था। ये बहुत शक्तिशाली है और ये करीब आठ से नौ टन भार ले जा सकता है. वहीं, ये विमान सुखोई की तरह कई तरह के हथियार को भी कैरी कर सकता है।

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