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ना इंजन, ना डिब्बे! PM Modi ने बाइडेन को तोहफे में दी ये चांदी की ट्रेन

यह प्राचीन सिल्वर ट्रेन मॉडल, सिर्फ एक तोहफा ही नहीं, बल्कि यह एक दुर्लभ और असाधारण कृति है जिसे महाराष्ट्र के कारीगरों ने बहुत बारीकी से तैयार किया है।

by Priya Shandilya
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिका दौरा कई अहम समझौतों की सौगात लेकर आया है। गार्जियन ड्रोन्स खरीदने से लेकर भारतीय पुरावशेषों को वापस देश लाने तक, पीएम मोदी के इस तीन दिवसीय दौरे ने कई महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम दिया है। इसी दौरान नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति जो बाइडेन को एक प्राचीन सिल्वर ट्रेन मॉडल और फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन को एक पश्मीना शॉल उपहार में देकर क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन का समापन किया।

ट्रेन मॉडल की क्या है खासियत?

यह प्राचीन सिल्वर ट्रेन मॉडल, सिर्फ एक तोहफा ही नहीं, बल्कि यह एक दुर्लभ और असाधारण कृति है जिसे महाराष्ट्र के कारीगरों ने बहुत बारीकी से तैयार किया है। यह भारतीय धातु संबंधी कलात्मकता की गहराई को प्रदर्शित करता है। इसे बनाने के लिए 92.5 प्रतिशत चांदी का इस्तेमाल किया गया है। इसे बनाने में खास किस्म की तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसमें उभरे हुए डिजाइन बनाने के लिए पीछे से हथौड़ा मारा जाता है। साथ ही यह वास्तुकला भाप लोकोमोटिव युग को भी श्रद्धांजलि देता है।

ट्रेन मॉडल पर अंकित जो बाइडेन के होमटाउन का नाम

इन तोहफों के आदान-प्रदान के जरिये दोनों देशों के बीच मजबूत राजनयिक संबंधों का जश्न मनाया गया, जिसे दोनों नेताओं ने एक जॉइंट स्टेटमेंट में “21वीं सदी की निर्णायक साझेदारी” कहा है। यह ट्रेन मॉडल भारत और अमेरिका के बीच संबंधों के महत्व को भी दर्शाता है, जिसमें इंजन के किनारों पर “दिल्ली-डेलावेयर” नाम अंकित किया गया है। मालूम हो, अमेरिकी राष्ट्रपति, डेलावेयर के रहने वाले हैं।

वहीं, पीएम मोदी ने फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन को बेहद खास पश्मीना शॉल तोहफे स्वरुप दिया है, जो कि जम्मू-कश्मीर में बने कपड़ों की सुंदरता और उसके अनूठे डिजाइनों को पेश करता है।

बता दें, इस तीन दिवसीय अमेरिका दौरे में अमेरिका ने भारत को 297 पुरावशेष लौटाएं हैं। इसके साथ ही 2016 के बाद से अमेरिका से बरामद चोरी हुई भारतीय पुरावशेषों की कुल संख्या 578 हो गई है।

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