Pushpak Landing: इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) ने शुक्रवार की सुबह कर्नाटक के चित्रदुर्ग में ‘पुष्पक’ को सफलतापूर्वक लैंड (Pushpak landing) करवाया। इसरो ने एक ट्वीट के जरिए इसकी जानकारी दी है। पुष्पक एसयूवी के साइज का पंखों वाला रॉकेट है, जिसे ‘स्वदेशी स्पेश शटल’ भी कहा जा रहा है। ये रीयूजेबल रॉकेट सेगमेंट में सफलता हासिल करने की दिशा में भारत का बड़ा कदम है।

क्या है पुष्पक (Pushpak landing)
पुष्पक खास तरह का स्पेस शटल है। जो अंतरिक्ष में सेटेलाइट्स और कार्गो ले जाने का काम करेगा। इससे पहले 2 अप्रैल 2023 को ISRO, DRDO और भारतीय वायुसेना ने मिलकर लैंडिंग टेस्ट किया था। उस समय चिनूक हेलिकॉप्टर से पुष्पक को 4.5 km की ऊंचाई से छोड़ा गया था। जिसके बाद यान ने खुद ही सफल लैंडिंग की। पुष्पक पूरी तरह से स्वदेशी है। कुछ साल में हमारे एस्ट्रोनॉट्स इसके बड़े वर्जन में कार्गो डालकर अंतरिक्ष तक पहुंचा सकते हैं। इयके अलावा सेटेलाइट्स लॉन्च कर सकते हैं।
इसरो ने जी जानकारी
इसरो ने कहा कि रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल (आरएलवी) टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में RLV LEX-02 लैंडिंग एक्सपेरिमेंट के जरिए मील का पत्थर हासिल किया गया है। इस टेस्ट को कर्नाटक के चित्रदुर्ग में बने एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज (एटीआर) में सुबह 7.10 बजे किया गया। पंखों वाला पुष्पक (आरएलवी-टीडी) ऑफ-नॉमिनल ऊंचाई से छोड़े जाने के बाद रनवे पर सटीक तरीके से सफलतापूर्वक लैंड हुआ। एयरफोर्स के हेलिकॉप्टर के जरिए रॉकेट को आसमान से गिराया गया था।

अंतरिक्ष में छोड़कर वापस लौटेगा
यह सेटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़कर वापस आएगा। ताकि फिर से उड़ान भर सके। इतना ही नहीं, यह किसी भी देश के ऊपर निगरानी करने अथवा हमला करने में कारगर होगा। इसके जरिये अंतरिक्ष में ही दुश्मन की सेटेलाइट को बर्बाद कर सकते हैं। ऐसी टेक्नोलॉजी का फायदा अमेरिका, रूस और चीन भी उठाना चाहते है। इसका इस्तेमाल अंतरिक्ष में कचरा साफ करने और सेटेलाइट्स की मरम्मत के लिए भी किया जा सकता है।
रीयूजेबल लॉन्चिंग व्हीकल के पहले दो परीक्षण भी रहे थे सफल
इसरो इससे पहले भी दो बार रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल की सफल लैंडिंग करा चुका है। बीते साल इसरो ने रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल के परीक्षण के दौरान आरएलवी को वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर से करीब साढ़े चार किलोमीटर की ऊंचाई से छोड़ा गया। परीक्षण के दौरान आरएलवी ने सफलतापूर्वक रनवे पर लैंड किया।
आरएलवी ने ब्रेक पैराशूट, लैंडिंग गियर ब्रेक और नोज व्हील स्टीयरिंग सिस्टम की मदद से सफल लैंडिंग की। रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल की सफल लैंडिंग से इसरो द्वारा विकसित की गई तकनीक जैसे नेवीगेशन, कंट्रोल सिस्टम, लैंडिंग गियर और डिक्लेयरेशन सिस्टम की सफलता पर भी मुहर लग गई है।
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