
रांची : शारदीय दुर्गा पूजा के दौरान झारखंड की राजधानी रांची में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। त्योहार के दौरान शराब की दुकानों को बंद रखने से लेकर ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण तक के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, पूजा पंडालों में अग्निशमन यंत्र रखना और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है। प्रशासन का उद्देश्य दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना, भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना है।
रांची में दुर्गा पूजा पर शराब की दुकानें रहेंगी बंद
दुर्गा पूजा के अवसर पर राजधानी रांची में शराब की दुकानों को बंद रखने का निर्देश दिया गया है। त्योहार के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने शराब की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया है। इसके साथ ही अवैध शराब की बिक्री, परिवहन और भंडारण करने वालों पर भी निगरानी रखी जाएगी।
प्रशासन के अनुसार, अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को अवैध शराब की बिक्री और आपूर्ति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
दुर्गा पूजा के दौरान शहर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। शराब की दुकानों को बंद रखने और अवैध कारोबार पर कार्रवाई के जरिए त्योहार के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था को रोकने की तैयारी की गई है।
रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर और डीजे पर प्रतिबंध
दुर्गा पूजा के दौरान ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण रखने के लिए भी प्रशासन ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश के मुताबिक, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर, डीजे और अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। इस अवधि में तेज आवाज में संगीत बजाने की अनुमति नहीं होगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ध्वनि प्रदूषण से संबंधित नियमों का पालन सभी पूजा समितियों और आयोजकों को करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाली पूजा समितियों और डीजे संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज करने सहित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
रात के समय तेज आवाज से आम लोगों, बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को परेशानी हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल पर निर्धारित समय सीमा लागू की गई है। पूजा समितियों को कार्यक्रमों के आयोजन के दौरान निर्धारित नियमों और न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
दुर्गा पूजा पंडालों में अग्निशामक यंत्र रखना अनिवार्य
रांची में दुर्गा पूजा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए सभी पूजा समितियों को पंडालों में अग्निशामक यंत्र रखने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आग लगने जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम पहले से किए जाने चाहिए।
पूजा पंडालों में बिजली की सजावट, रोशनी और श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए अग्नि सुरक्षा के उपाय महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में समितियों को सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने और आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी व्यवस्था रखने को कहा गया है।
इसके साथ ही पूजा समितियों को पंडालों में स्वयंसेवकों की तैनाती सुनिश्चित करनी होगी। स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित रखने और जरूरत पड़ने पर लोगों की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। प्रशासन चाहता है कि दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध हो सके।
रांची दुर्गा पूजा में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर प्रशासन की नजर
दुर्गा पूजा के दौरान राजधानी में विभिन्न स्थानों पर पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था, ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण और आग से बचाव के उपायों का पालन जरूरी है। जिला प्रशासन ने पूजा समितियों को निर्देशों का पालन करने और आयोजन के दौरान सतर्कता बरतने को कहा है।
शराब की दुकानों को बंद रखने, अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई करने, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और डीजे पर रोक लगाने तथा पूजा पंडालों में अग्निशामक यंत्र रखने जैसे निर्देश इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं।

