

RANCHI : झारखंड की राजधानी रांची में आवारा कुत्तों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। शहर के कई इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक भी बढ़ा हुआ है। कुत्तों के झुंड अब आम जनता के लिए परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। हैरत की बात यह है कि नगर निगम के पास यह जानकारी नहीं है कि रांची में कुल कितने कुत्ते हैं।

वहीं आंकड़ों की बात करें तो पिछले छह सालों से कुत्तों की कोई गणना या सर्वे नहीं हुआ है, जिससे वास्तविक संख्या का पता लगाना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह-शाम सड़कों पर दौड़ते और झुंड में घेरते कुत्ते डर का कारण बन रहे हैं। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए ये कुत्ते खतरा बन चुके हैं। कई बार ये लोगों को दौड़ा रहे हैं, जिससे दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। कुछ लोग कुत्तों की वजह से चोटिल भी हो रहे हैं।

धीमी गति से चल रही प्रक्रिया
नगर निगम ने कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए कैचिंग एंड स्टरलाइजेशन की प्रक्रिया शुरू तो की थी, लेकिन यह भी धीमी गति से चल रही है। इस काम की जिम्मेदारी नगर निगम ने होप एंड एनिमल ट्रस्ट नामक एनजीओ को सौंपी है। संस्था के पास संसाधनों और कर्मचारियों की कमी के कारण यह कार्य पूरी रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन एक दर्जन से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी नहीं की जा सकती, जबकि वास्तविक जरूरत इससे कहीं अधिक है। वहीं, शहर के प्रमुख इलाकों जैसे कोकर, डोरंडा, बरियातू, हरमू और कांके जैसे इलाकों में हर गली में दर्जनों आवारा कुत्ते देखने को मिलते हैं।

हर दिन डॉग बाइट के 200 केस
राजधानी में हर दिन 200 के करीब डॉग बाइट के केस आ रहे हैं। इससे ये तो साफ है कि कुत्तों का शहर में आतंक बढ़ रहा है। कुत्ते के काटने पर लोगों को एंटी रेबीज की 5 डोज लेनी होती है। इस वजह से लोग भी परेशान हैं। वैक्सीन लगाने के लिए भी लोगों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।
बॉर्डर वाले एरिया का बहाना
नगर निगम की असिस्टेंट हेल्थ ऑफिसर डॉ. किरण कुमारी का कहना है कि जल्द ही पूरे शहर में एक व्यापक सर्वे कराया जाएगा, ताकि कुत्तों की वास्तविक संख्या का आकलन किया जा सके। इसके आधार पर नसबंदी, टीकाकरण और पुनर्वास की योजनाओं को गति दी जाएगी। इसके साथ ही कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कुत्तों की आबादी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि निगम क्षेत्र के बॉर्डर वाले इलाके में बाहर के कुत्ते आकर आबादी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कार्ययोजना बनाई जा रही है, लेकिन सर्वे और संसाधनों की कमी है। फिलहाल रेंट पर गाड़ी लेने का निर्देश नगर प्रशासक ने दिया है। इससे स्टरलाइजेशन के काम में तेजी आएगी।
