रांची : अफ्रिकन देशों में जाने के लिए येलो वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट अब रिम्स में मिल सकेगा। राज्य का पहला येलो फीवर वैक्सीनेशन सेंटर गुरुवार से शुरू हो गया। पहले दिन चार लोगों को वैक्सीनेशन भी दी गई। रिम्स निदेशन डा. आरके गुप्ता ने बताया कि विदेश जाने वाले लोगों को कई देशों में येलो वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट मांगा जाता है।
अब यह सर्टिफिकेट रिम्स में ही मिलेगा। भारत से बाहर कई ऐसे देश हैं जहां येलो फीवर का प्रकोप बहुत ज्यादा है। ऐसे में उन देशों में जाने से पहले इसका वैक्सीनेशन सर्टिफि केट दिखाना पड़ता है। बिना वैक्सीनेशन के जाने से संक्रमित होने का डर बना रहता है।
अभी तक झारखंड के लोगों को पटना या कोलकाता जाना पड़ता हैं जहां वो इसकी वैक्सीन ले पाते हैं। लेकिन अब उन्हें बाहर नहीं जाना पड़ेगा। रिम्स के पीएसएम विभाग में दो कमरों का आवंटन भी किया गया है जहां वैक्सीन दिया जा रहा है।
क्या है येलो फीवर :
येलो फीवर एक तीव्र हैमरैजिक रोग है, जो मनुष्यों में संक्रमित मच्छर के काटने से होता है। इसके संक्रमित रोगियों में से 50 प्रतिशत की मौत हो जाती है। इसके प्रमुख लक्षणों में बुखार, सिर दर्द, मुंह, नाक, कान और पेट में रक्त स्राव, उलटी, मितली, जी मचलना, लीवर और किडनी के काम करने में समस्या, पेट में दर्द, पीलिया हैं। एक खास प्रजाति के मच्छर की वजह से येलो फ वर फैलता है। इसके वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट की जरूरत विदेश जाने से पहले पड़ती है।
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