

RANCHI: राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में यदि आग लग जाए तो हालात बेकाबू और जानलेवा हो सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है अस्पताल में मौजूद फायर फाइटिंग सिस्टम का पूरी तरह से फेल होना है। बता दें कि पिछले दिनों झारखंड हाईकोर्ट की टीम ने निरीक्षण के बाद रिपोर्ट सौंप दी थी। साथ ही इसे मरीजों के लिए खतरनाक भी बताया था। इसके बावजूद प्रबंधन मामले को लेकर गंभीर नहीं है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो रिम्स की सुपरस्पेशियलिटी बिल्डिंग में 500 से अधिक मरीज भर्ती रहते हैं। इसके अलावा मरीजों के साथ परिजन भी होते है। वहां न तो फायर डिटेक्शन सेंसर एक्टिव हैं और न ही मॉक ड्रिल कराई गई है। जिससे साफ है कि यदि अचानक आग लगती है, तो न मरीजों को समय पर आगाह किया जा सकता है और न ही उन्हें सुरक्षित निकाला जा सकता है।

फायर फाइटिंग सिस्टम सिर्फ नाम का
निरीक्षण के दौरान यह पाया गया था कि बिल्डिंग में लगा फायर फाइटिंग सिस्टम सिर्फ नाम का है। न तो पाइपलाइन है, न ही वॉटर पंप काम कर रहे हैं। फायर अलार्म के बारे में पूछने पर अधिकारियों ने चुप्पी साध ली थी। इसके अलावा इमारत में लगे स्मोक डिटेक्टर भी लंबे समय से बंद पड़े हैं। हैरानी की बात यह है कि सुपरस्पेशियलिटी बिल्डिंग को भारी बजट में तैयार किया गया था। इसके मेंटेनेंस पर भी करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे है। लेकिन फायर सेफ्टी पर प्रबंधन का ध्यान नहीं है।

इमरजेंसी एक्शन प्लान उपलब्ध नहीं
बता दें कि लंबे समय से मॉक ड्रिल नहीं कराई गई है। न ही कोई इमरजेंसी एक्शन प्लान उपलब्ध है जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मरीजों की सुरक्षा का कोई स्पष्ट ब्लूप्रिंट नहीं है। यह स्थिति अस्पताल प्रबंधन की प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है। करोड़ों की लागत से बनी व्यवस्था का रखरखाव नहीं करना और सुरक्षा को लेकर अनदेखी करना संकट को न्योता देना है।

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