साहिबगंज : वाराणसी से फरक्का जा रही एक ट्रेन की तलाशी के दौरान रेलवे स्टेशन नहीं, बल्कि डिब्बों के भीतर छिपी एक खामोश तस्करी की दुनिया खुलकर सामने आ गई। बरहड़वा स्टेशन पर आरपीएफ की सख्त चेकिंग में जब बैग खुले, तो उनमें कपड़े या सामान नहीं, बल्कि हजारों जिंदा कछुए तड़पते हुए मिले, जिसने न सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों, बल्कि वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था को भी झकझोर कर रख दिया। उधर, इस मामले में आरपीएफ ने दो महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया है, जबकि कुछ तस्कर मौके का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहे। बरामद कछुओं को 22 बैग में भरकर तस्करी की जा रही थी। तीनों तस्कर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के रहने वाले हैं। उनकी पहचान करण पाथकर (25), मंजू पाथकर (30) और उषा पाथकर के रूप में हुई है।
इस स्टेशन से पकड़े गए
आरपीएफ के अनुसार, यह कार्रवाई बरहड़वा रेलवे स्टेशन पर की गई, जहां आरपीएफ की टीम नियमित चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान नई दिल्ली से फरक्का जा रही डाउन फरक्का एक्सप्रेस ट्रेन (15744) के कुछ डिब्बों में संदिग्ध हालात में बैग पाए गए। जब आरपीएफ जवानों ने बैगों की तलाशी ली, तो उनमें अलग-अलग साइज के 1000 से अधिक जीवित प्रतिबंधित कछुए मिले।
वाराणसी से फरक्का ले जाए जा रहे थे प्रतिबंधित कछुए
प्रारंभिक पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि कछुओं को वाराणसी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में लोड किया गया था। उन्हें फरक्का ले जाया जा रहा था, जहां किसी बड़े तस्कर को सौंपा जाना था। आरपीएफ इंस्पेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे एक संगठित तस्कर गिरोह सक्रिय है। कछुए कहां से लाए गए और इन्हें किस संरक्षण में ट्रांसपोर्ट किया जा रहा था, इसकी गहन जांच की जा रही है।
कोहरे के कारण लेट पहुंची ट्रेन, चेकिंग में खुला राज
बताया गया कि कोहरे और अन्य कारणों से फरक्का एक्सप्रेस अपने तय समय से काफी देरी से बरहड़वा स्टेशन पहुंची। ट्रेन को सुबह 8:15 बजे पहुंचना था, लेकिन यह शाम करीब 5 बजे स्टेशन पर पहुंची। इसी दौरान आरपीएफ को चेकिंग का पर्याप्त समय मिला और यह बड़ी तस्करी पकड़ी गई।

