देवघर : आज से श्रावणी मास की शुरुआत होते ही झारखंड स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर (Baba Baidyanath Dham) में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सावन के पहले दिन सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही देश भर से पहुंचे हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए लंबी कतारों में लग गए। दिल्ली, मुंबई, नासिक, गोवा, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों से भक्त बाबा भोलेनाथ की एक झलक पाने और जल चढ़ाने पहुंचे हैं। श्रावणी मेले की शुरुआत के साथ ही धार्मिक आस्था का वातावरण और उत्साह चरम पर है।
Baba Baidyanath Dham : पूजन व्यवस्था सुदृढ़ : अर्घा प्रणाली से हो रहा जलाभिषेक
पुजारियों के अनुसार, मंदिर में सबसे पहले विधिवत पूजा और जलाभिषेक के बाद पट खोले गए। सामान्य श्रद्धालु सुबह 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक जलाभिषेक कर सकेंगे। श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए स्पर्श दर्शन की जगह अर्घा प्रणाली लागू की गई है। इसके माध्यम से भक्त बिना सीधे संपर्क के बाबा भोलेनाथ को जल अर्पित कर पा रहे हैं। यह व्यवस्था पहले दिन से ही प्रभावी हो गई है।
Baba Baidyanath Dham : सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था : पूरे मंदिर परिसर में पुलिस तैनात
श्रावणी मेले को देखते हुए देवघर जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर से लेकर श्रीराम झा चौक तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई है। भीड़ प्रबंधन, दर्शन व्यवस्था, मेडिकल सुविधा और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए अलग-अलग टीमों को सक्रिय किया गया है। श्रद्धालुओं ने प्रशासन की व्यवस्था की सराहना करते हुए बताया कि भीड़ के बावजूद दर्शन में बहुत कठिनाई नहीं हो रही है।
श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा : पहले दिन एक लाख जलाभिषेक की संभावना
बाबा मंदिर के पुजारियों और स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि इस बार पिछले वर्षों की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक होने की संभावना है। पहले दिन की भीड़ को देखते हुए शाम तक एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के जलाभिषेक करने का अनुमान जताया गया है। मंदिर प्रशासन के मुताबिक, पूरे सावन माह में लगभग 50 से 60 लाख श्रद्धालुओं के देवघर पहुंचने की संभावना है।
श्रावणी मेले का आधिकारिक उद्घाटन : 10 जुलाई को हुआ शुभारंभ
10 जुलाई को झारखंड के पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने श्रम मंत्री संजय यादव और पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के साथ मिलकर श्रावणी मेले का आधिकारिक उद्घाटन किया था। इसके बाद से ही देशभर से श्रद्धालुओं का देवघर पहुंचना प्रारंभ हो गया है। यह मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय व्यापार और पर्यटन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

