Home » DDUGU: गैलेक्‍सी के रहस्‍यों से पर्दा उठाने के लिए तारागुच्छों का अध्ययन कर रहे गोरखपुर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक

DDUGU: गैलेक्‍सी के रहस्‍यों से पर्दा उठाने के लिए तारागुच्छों का अध्ययन कर रहे गोरखपुर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक

तारागुच्छों को खगोल विज्ञान में "खगोलीय प्रयोगशाला" कहा जाता है क्योंकि इनके अध्ययन से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलती है कि तारे कैसे जन्म लेते हैं, विकसित होते हैं और अंततः समाप्त हो जाते हैं।

by Anurag Ranjan
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

गोरखपुर : दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDUGU) के वैज्ञानिकों ने हमारी आकाशगंगा (Milky Way) के गठन और विकास को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण शोध किया है। इस शोध में वे मुक्त तारागुच्छों (Open Star Clusters) का अध्ययन कर रहे हैं, जो उन तारों के समूह होते हैं जो एक साथ जन्मे होते हैं और आकाश में एक परिवार की तरह यात्रा करते हैं। यह शोध आकाशगंगा की संरचना और विकास के रहस्यों को समझने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।

शोध का नेतृत्व और उद्देश्य

इस शोध का नेतृत्व भौतिकी विभाग की डॉ. अपरा त्रिपाठी कर रही हैं, जो डॉ. सौरभ शर्मा, डॉ. नीलम पंवार, डॉ. रामाकांत यादव, और ब्रिजेश कुमार (वैज्ञानिक, ARIES, नैनीताल) के साथ मिलकर इस अध्ययन को आगे बढ़ा रही हैं। उनका मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि ये तारागुच्छ आकाशगंगा की संरचना और विकास में किस प्रकार योगदान करते हैं।

DDUGU: डॉ. अपरा त्रिपाठी
डॉ. अपरा त्रिपाठी

तारागुच्छों का अध्ययन क्यों महत्वपूर्ण है?

तारागुच्छों को खगोल विज्ञान में “खगोलीय प्रयोगशाला” कहा जाता है क्योंकि इनके अध्ययन से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलती है कि तारे कैसे जन्म लेते हैं, विकसित होते हैं और अंततः समाप्त हो जाते हैं। तारागुच्छों के माध्यम से वैज्ञानिक कई महत्वपूर्ण सवालों के उत्तर तलाशने की कोशिश कर रहे हैं, जैसे:
• तारे समय के साथ कैसे बदलते हैं?
• तारों के समूह एक-दूसरे के साथ कैसे संपर्क करते हैं?
• ये तारागुच्छ हमारी आकाशगंगा के इतिहास के बारे में क्या बता सकते हैं?

अंतरिक्ष और ग्राउंड-आधारित दूरबीनों से अध्ययन

इस शोध में तारागुच्छों की दूरी, आयु और गति को मापने के लिए गैया (Gaia) जैसे स्पेस टेलीस्कोप और ग्राउंड-आधारित ऑप्टिकल एवं इन्फ्रारेड टेलीस्कोप का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन टेलीस्कोपों की मदद से शोधकर्ता तारागुच्छों का सटीक अध्ययन कर रहे हैं।
दृष्टि भ्रम और तारों का चयन

तारागुच्छों के अध्ययन में एक बड़ी चुनौती यह होती है कि यह निर्धारित किया जाए कि कौन से तारे वास्तव में इस समूह का हिस्सा हैं और कौन से सिर्फ दृष्टि भ्रम के कारण पास दिखाई दे रहे हैं। सटीक खगोलीय डेटा (astrometric data) की मदद से शोधकर्ता यह पहचानने की कोशिश कर रहे हैं कि कौन से तारे वाकई एक समूह का हिस्सा हैं और कौन से पृष्ठभूमि (background) या अग्रभूमि (foreground) में हैं।

द्रव्यमान पृथक्करण और परिवर्तनशील तारे

शोधकर्ता द्रव्यमान पृथक्करण (Mass Segregation) की प्रक्रिया का अध्ययन भी कर रहे हैं, जिसमें भारी तारे धीरे-धीरे तारागुच्छ के केंद्र की ओर खिसकते हैं जबकि हल्के तारे बाहरी ओर चले जाते हैं। इस प्रक्रिया से वैज्ञानिक यह समझ पा रहे हैं कि तारागुच्छ लाखों वर्षों में कैसे विकसित होते हैं। साथ ही, वे परिवर्तनशील तारों (variable stars) का भी अध्ययन कर रहे हैं, जो समय के साथ अपनी चमक बदलते हैं। ये तारे तारों की आंतरिक संरचना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं और तारकीय विकास के मौजूदा मॉडलों को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

आकाशगंगा की उत्पत्ति और संरचना को समझना

इस शोध में शोधकर्ता आधुनिक सांख्यिकीय और कम्प्यूटेशनल तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, ताकि तारागुच्छों पर पिछले अध्ययनों में पाई गई विसंगतियों को दूर किया जा सके। इस शोध के जरिए हम हमारी आकाशगंगा की उत्पत्ति, संरचना और विकास के बारे में और अधिक जान सकते हैं।

DDUGU की गौरवपूर्ण उपलब्धि

DDUGU की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने इस शोध को विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा, “यह शोध दर्शाता है कि DDUGU वैज्ञानिक खोज और नवाचार में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। तारागुच्छों का अध्ययन करके हमारे शोधकर्ता आकाशगंगा के विकास को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यह विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है।”

वैज्ञानिकों का अंतरराष्ट्रीय योगदान

इस शोध के परिणामों को कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित किया गया है, जिससे खगोल भौतिकी के क्षेत्र में DDUGU का महत्वपूर्ण योगदान हुआ है। शोधकर्ताओं की इस खोज ने अंतरिक्ष के रहस्यों को समझने में नई दिशा दी है, जो भविष्य में और भी नई खोजों का मार्ग प्रशस्त करेगी।

Read Also: 15 मार्च को होली पर्व को देखते हुए सीबीएसई ने छात्रों को परीक्षा छोड़ने का दिया विकल्प

Related Articles