मणिपुर : मणिपुर में पिछले साल 3 मई से शुरू हुई जातीय हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गत सोमवार को मणिपुर के जिरीबाम जिले में हुई हिंसक घटना ने स्थिति को और विकट बना दिया। इस दौरान सशस्त्र कुकी उग्रवादियों ने पुलिस स्टेशन और सीआरपीएफ कैंप पर हमला किया, जिससे राज्य में फिर से तनाव फैल गया है। हमले में सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में 11 उग्रवादी मारे गए और दो CRPF जवान घायल हो गए। इसके बाद कुकी-जो समुदाय ने 12 नवंबर यानी मंगवलार (आज) को राज्य के पहाड़ी इलाकों में पूर्ण बंद का आह्वान किया है।
जिरीबाम में उग्रवादी हमला
11 नवंबर को दोपहर करीब 3 बजे उग्रवादियों ने जकुराडोर और बोरोबेकरा पुलिस स्टेशन के पास स्थित सीआरपीएफ कैंप पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस दौरान उग्रवादियों ने पास के बाजार और आसपास की दुकानों तथा घरों में आग भी लगा दी। सुरक्षा बलों ने त्वरित प्रतिक्रिया दी और करीब 40-45 मिनट तक भारी गोलीबारी का सामना किया। अंततः सीआरपीएफ ने हमलावरों को घेर लिया और 11 उग्रवादियों को मार गिराया। इस मुठभेड़ में सीआरपीएफ के कांस्टेबल संजीव कुमार घायल हो गए, जिन्हें गंभीर हालत में इलाज के लिए सिलचर मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
फिलहाल, पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दी है और घटनास्थल से हथियारों और गोला-बारूद के साथ उग्रवादियों के शव बरामद किए हैं। मणिपुर पुलिस ने उग्रवादियों के खिलाफ अभियान जारी रखने की बात की है और असम राइफल्स, सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस की टीमों को घटनास्थल पर भेजा गया है।
कुकी-जो काउंसिल का बंद आह्वान
इस हमले के बाद कुकी-जो काउंसिल ने 12 नवंबर 2024 को सुबह 5 बजे से शाम 6 बजे तक राज्य के पहाड़ी इलाकों में पूर्ण बंद का आह्वान किया। कुकी-जो काउंसिल ने इस हमले को ‘दुखद घटना’ करार देते हुए आरोप लगाया कि उनके 11 ग्राम स्वयंसेवकों को सीआरपीएफ ने बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी। काउंसिल ने इस हत्याकांड के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है और इसके लिए जांच की अपील की है।
कुकी-जो समुदाय ने इस हिंसा के खिलाफ विरोध जताया है और इसे अपने समुदाय के लिए एक ‘विनाशकारी झटका’ बताया है। काउंसिल का कहना है कि उनका संघर्ष शांति, न्याय और सुरक्षा के लिए है, और वे इस संघर्ष में एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे।
जिरीबाम में कर्फ्यू और सुरक्षा स्थिति
जिरीबाम जिले में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों ने कर्फ्यू लगा दिया है, जो अगले आदेश तक जारी रहेगा। उग्रवादियों के हमले के बाद, पुलिस ने यह स्पष्ट किया कि बोरोबेकरा पुलिस स्टेशन के परिसर में एक राहत शिविर भी स्थित है, जहां पांच लोग लापता हैं। यह संदेह जताया जा रहा है कि उग्रवादियों ने इन नागरिकों का अपहरण कर लिया है, हालांकि यह भी हो सकता है कि वे हमले के दौरान छिप गए हों। लापता लोगों की तलाश जारी है।
उग्रवादियों के हमले और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की संभावना है, और इसके मद्देनजर बीएनएसएस धारा 163 के तहत कर्फ्यू लागू किया गया है।
मणिपुर में जातीय हिंसा का संदर्भ
मणिपुर में हिंसा की शुरुआत 3 मई 2023 को हुई थी, जब मणिपुर हाई कोर्ट ने मैतेई समुदाय के अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिए जाने की सिफारिश की। इस फैसले का कुकी-जो समुदाय ने विरोध किया, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे उनके आरक्षण का हिस्सा घट जाएगा। मणिपुर में मैतेई समुदाय बहुसंख्यक हैं और यह समुदाय अधिकतर इंफाल घाटी में बसता है, जबकि कुकी-जो समुदाय की अधिकांश आबादी पहाड़ी क्षेत्रों में रहती है। इस फैसले के बाद से दोनों समुदायों के बीच हिंसा की घटनाएं बढ़ने लगीं।
मणिपुर में इस जातीय हिंसा के कारण 200 से ज्यादा लोग मारे गए और हजारों लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं। 60,000 से ज्यादा लोग राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। हिंसा का यह सिलसिला न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी विनाशकारी साबित हो रहा है।
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