रांची: झारखंड में सीजीएल परीक्षा को लेकर राज्य में इंटरनेट बंद करने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई है। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत में सुनवाई हुई है। वहीं अदालत ने फिलहाल इंटरनेट सेवा को प्रभावित किए जाने वाले आदेश पर रोक लगाने से इनकार किया है और राज्य सरकार से चार सप्ताह में शपथ पत्र के माध्यम से जवाब मांगा है।

अदालत ने यह जानना चाहा है कि क्या सभी परीक्षाओं में इसी तरह से इंटरनेट बंद कर दिए जाएंगे। इंटरनेट को बंद करने पर सरकार की क्या नीति है? और किस-किस समय में इंटरनेट बंद किया जाएगा? इसके लिए क्या कुछ नीति बनाई गई है? साथ ही मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। यह जानकारी हाईकोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार ने दी। वहीं मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड हाई कोर्ट ने विशेष बेंच ने इंटरनेट सेवा बहाल करने से इनकार करते हुए कहा कि इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 69 ए के तहत राज्य सरकार को अधिकार है।
बता दें, कल 22 सितंबर यानी रविवार को सुबह के 4 बजे से दोपहर 3:30 तक इंटरनेट सेवा बाधित रहेगी। मामले में स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष राजेंद्र कृष्णा ने जनहित याचिका दाखिल की थी।
हालाकि इससे लोगों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने X कर इस मुद्दे को हेमंत सोरेन के समक्ष उठाया है। एक यूजर ने लिखा, “स्वागत है आपका नए डिजिटल भारत में, जहां पेपर लीक के डर से Neet exam केंद्र हजारों km दूर कर दिया जाता है भले ही परीक्षा छूट जाए। झारखंड के तरह पूरे राज्य की इंटरनेट सेवा बंद कर निवासियों को प्राचीन युग में धकेल दिया जाता है। वो दिन दूर नहीं जब ऐसा भी तुगलकी फरमान आ जाए कि exam फॉर्म का आवेदन भरते ही आपका मोबाइल कदाचार रोकने हेतु जब्त हो जाए।
लोकतंत्र का अद्भुत नजारा जहां निकम्मी सरकारों के असफलताओं का खामियाजा निर्दोष जनता चुकाती है।” वहीं एक अन्य ने लिखा, “परीक्षा में कदाचार रोकने के लिए पूरे प्रदेश की इंटरनेट सेवा बंद करना मूर्खता तो #झारखंड सरकार ही कर सकती है। इस निर्णय ने राज्य में कितना नुक्सान हुआ इसकी जांच करनी चाहिए।” इन ट्वीट पर बहुत से लोगों ने सहमति जताई है और हेमंत सोरेन से इंटरनेट सेवा बंद होने की वजह से नुकसान होने का जवाब मांगा है।

