नई दिल्ली : Waqf Amendment Bill : केंद्र सरकार ने वक्फ बोर्डो को नियंत्रित करने वाले कानून में संशोधन से संबंधित विधेयक गुरुवार को लोकसभा में पेश किया, जिसके बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने की अनुशंसा की गई। इससे केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने सदन में वक्फ विधेयक-2024 पेश किया और विभिन्न दलों की मांग के अनुसार विधेयक को संसद की संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का प्रस्ताव किया। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि ‘’मैं सभी दलों के नेताओं से बात करके इस संयुक्त संसदीय समिति का गठन करुंगा’।

विपक्षी सदस्यों ने विधेयक का विरोध किया और कहा कि यह संविधान, संघवाद और अल्पसंख्यकों पर हमला है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के दो प्रमुख घटक दल जनता दल (यूनाइटेड) और तेलुगू देसम पार्टी (तेदेपा) ने विधेयक का समर्थन किया। हालांकि तेदेपा ने इसे संसदीय समिति के पास भेजने की पैरवी की है। वहीं विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि विधेयक में किसी धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है तथा संविधान के किसी भी अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं किया गया है।
Waqf Amendment Bill : नए विधेयक में क्या बदलाव किए गए हैं
बता दें कि बिल के जरिए मौजूदा कानूनों में करीब 40 संशोधन किए गए। वहीं 1995 और 2013 के वक्फ कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव भी किया गया है।
– वक्फ बोर्ड जिस संपत्ति पर दावा करेगा, उसके लिए सत्यापन अनिवार्य होगा। वहीं बोर्ड पर अधिकारों का दुरुपयोग कर किसी भी प्रॉपर्टी को वक्फ की घोषित करने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन नए कानून में ऐसा नहीं होगा।
– वक्फ संपत्तियों के सत्यापन का अधिकार डीएम के पास होगा। यानी डीएम तय करेंगे कि प्रॉपर्टी वक्फ की है या नहीं।
– वक्फ बोर्ड में महिला प्रतिनिधि को शामिल करना अनिवार्य होगा।
– शिया और सुन्नी की तरह बोहरा और आगाखानी समुदाय के लिए अलग वक्फ बोर्ड होगा।
Waqf Amendment Bill : बिल का विरोध क्यों हो रहा है
बिल का विरोध करने वालों को डर है कि 1995 के कानून में बदलाव से मुस्लिमों के हित प्रभावित हो सकते हैं, जो इन संपत्तियों का उपयोग धार्मिक उद्देश्यों के लिए करते हैं। नए संशोधनों से वक्फ बोर्ड कमजोर होगा, जिससे वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन की क्षमता प्रभावित होती है। वहीं वक्फ मामलों में जिला मजिस्ट्रेट को अधिकार मिलने से ब्यूरोक्रेसी का दखल बढ़ेगा। इससे बोर्ड सरकारी नियंत्रण में कार्य करेंगे।
वहीं, इस बिल का समर्थन करने वालों में जेडीयू, टीडीपी जैसी सहयोगी दल सरकार के साथ हैं। कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, लेफ्ट, एनसीपी शरद पवार गुट और एआईएमआईएम जैसे दलों ने विरोध जताया है। इसके साथ ही सरकार दावा कर रही है कि इन बदलावों के जरिए वो वक्फ कानून को बेहतर और बोर्ड को जवाबदेह बना रही है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सरकार ये समझाने की कोशिश कर रही है कि इस विधेयक से मुस्लिमों का भला होगा, लेकिन विपक्ष मानने को तैयार नहीं दिख रहा।

