चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिले को नक्सल मुक्त करने के लक्ष्य को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने अभियान को और तेज कर दिया है। इसी क्रम में सीआरपीएफ के आईजी साकेत कुमार और एसटीएफ के आईजी अनूप बिरथरे जिला मुख्यालय चाईबासा पहुंचे, जहां वे नक्सल विरोधी रणनीति को लेकर एक विशेष उच्चस्तरीय बैठक कर रहे हैं। यह बैठक ऑपरेशन मेघाबुरु के तहत नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की योजना को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से आयोजित की गई है।
नक्सलवाद के खात्मे को लेकर डेडलाइन तय
बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने झारखंड में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर 31 मार्च तक की डेडलाइन तय कर रखी है। फिलहाल फरवरी का महीना चल रहा है और समय बेहद सीमित है। ऐसे में सीआरपीएफ, एसटीएफ और जिला पुलिस ने नक्सल विरोधी अभियानों को और आक्रामक बनाने की पूरी तैयारी कर ली है।
गौरतलब है कि हाल ही में सारंडा के जंगलों में हुई बड़ी नक्सली मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने 17 नक्सलियों को मार गिराया था, जिनमें आनंद जैसे कुख्यात माओवादी नेता भी शामिल थे। इस सफलता के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि सारंडा, पोड़ाहाट समेत अन्य घने वन क्षेत्रों में इसी तरह के बड़े और निर्णायक ऑपरेशन आगे भी चलाए जाएंगे।
सारंडा को नक्सल मुक्त बनाना सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी चुनौती
सूत्रों के मुताबिक, सारंडा के जंगलों में अब भी कई बड़े माओवादी नेता सक्रिय हैं, जिनमें करोड़ों के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा जैसे नाम शामिल हैं। ऐसे में 31 मार्च तक पश्चिम सिंहभूम को नक्सल मुक्त बनाना सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों का दावा- नक्सलियों के खिलाफ अभियान और तेज
इस बीच सीआरपीएफ के आईजी साकेत कुमार और एसटीएफ के आईजी अनूप बिरथरे हेलीकॉप्टर से चाईबासा पहुंचे। टाटा कॉलेज मैदान में कोल्हान डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा और एसपी अमित रेणु ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मेघाबुरु ऑपरेशन और नक्सल विरोधी अभियानों को लेकर लगातार बैठकों का दौर शुरू हो गया है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि आने वाले दिनों में नक्सलियों के खिलाफ अभियान और तेज होगा तथा क्षेत्र में स्थायी शांति बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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