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अनंत चतुर्दशी व्रत कब है, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि

by Rakesh Pandey
अनंत चतुर्दशी व्रत कब है, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि
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अनंत चतुर्दशी:  हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भगवान विष्णु की अनन्य भक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व सब्र का प्रतीक है और अनंत सत्य का प्रतीक, जिसमें हम अनंत के महत्व को मन, वचन, और क्रिया से मानते हैं। इस पूजा में श्रीविष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना होती है। इस पूजा में बाजू पर 18 गांठ वाले अनंत सूत्र बांधने का विधान है। आज हम आपको अनंत चतुर्दशी के महत्व, व्रत की पूजा विधि मुहूर्तऔर इसके पीछे के रहस्य के बारे में जानकारी देंगे।

अनंत चतुर्दशी का महत्व

अनंत चतुर्दशी का आयोजन भगवान विष्णु की पूजा के रूप में होता है, और इसे भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भगवान विष्णु के एक नाम, अनंत, को याद करने के रूप में मनाया जाता है लोग इस दिन अपने परिवार के साथ मिलकर अनंत की पूजा करते हैं और अनंत कथा सुनते हैं, जिसमें अनंत के अनगिनत रूपों और आवतारों के महत्व का वर्णन होता है।

यह है शुभ मुहूर्त

पंचाग के मुताबिक इस साल 2023 में भाद्रपद माह शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 27 सितंबर की रात 10 बजकर 18 मिनट पर होगी, 28 सितंबर को 6 बजकर 49 मिनट पर इसका समापन होगा। इसी कारण उदया तिथि के अनुसार 28 सितंबर को अनंत चतुर्दशी मनाई जायेगी। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 12 मिनट से शाम 6 बजकर 49 मिनट तक है।

अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि

अनंत चतुर्दशी की पूजा का आयोजन सावधानीपूर्वक किया जाता है और इसमें निम्नलिखित चरण होते हैं:
व्रत का आरंभ: पूजा का आरंभ संध्या के समय होता है, जब व्रती विशेष ध्यान और संकल्प के साथ अपने गृह में बैठते हैं।
पूजा की सामग्री: पूजा के लिए आपको गंगाजल, गुड़, फल, फूल, सुपारी, लौंग, इलायची, और सुगंधित धूप-दीप की सामग्री की आवश्यकता होती है।

श्रीविष्णु का मूर्ति विधान:

व्रती श्रीविष्णु की मूर्ति को साफ और सुंदर रूप में सजाकर उसकी पूजा करती हैं।अनंत कथा का पाठ: पूजा के दौरान, अनंत कथा का पाठ किया जाता है, जिसमें भगवान विष्णु के अनंत रूपों के महत्व का विस्तार से वर्णन होता है।

धागा बांधना:

अनंत चतुर्दशी का खास रिचुअल है अनंत व्रती महिलाएं अपने पतियों के लिए खास धागा बांधती हैं। इस धागा को “अनंत” कहा जाता है और यह सम्पूर्ण व्रत का प्रतीक होता है। महिलाएं इस धागे का पूजा करती हैं और फिर अपने पतियों के हाथों में बांधती हैं, आशीर्वाद देती हैं, और उनकी लम्बी आयु और खुशी की कामना करती हैं।

अनंत चतुर्दशी का पालन करने से व्रती अनंत के अनगिनत रूपों के महत्व को समझती हैं और इसके माध्यम से आपसी समरसता और परम प्रेम की महत्वपूर्ण भावना को महसूस करते हैं। इस पर्व के माध्यम से, हम अनंत की महत्वपूर्ण शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाते हैं और एक अनंत और सुखमय जीवन की कामना करते हैं।

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