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गणेश चतुर्थी कब है, क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी? जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा-विधि?

by Rakesh Pandey
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गणेश चतुर्थी: सभी देवताओं में श्रेष्ठ माने जाने वाले सिद्धि विनायक भगवान श्री गणेश की पूजा को लेकर पूरे देश भर में अभी से उत्साह देखा जा रहा है। गणेश पूजा में महज अब एक सप्ताह से भी कम समय बचा हैं। भक्त अपने आराध्य की पूजा के लिए पूरे जोर से तैयारी कर रहे हैं। हर साल की तरह इस बार भी भगवान गणेश की पूजा धूम होगी। भक्त इस साल भी गाजे-बाजे के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करेंगे।

इसे लेकर देश भर में जगह-जगह पर बड़े-बड़े पंडाल का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही भव्य मेले का भी आयोजन किया जा रहा है। यह पूजा पूरे 10 दिन तक चलेगी। गणेश पूजा विशेष रूप से महाराष्ट्र में बड़े धूम धाम से मनाई जाती है।

गणेश चतुर्थी कब है?
हर साल की तरह इस बार भी गणेश पूजा भाद्रपद शुक्ल पक्ष के चतुर्थी तिथि को मनाया जायेगा। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस साल गणेश चतुर्थी की शुरुआत 18 सितंबर की दोपहर 2:09 बजे से शुरू होकर 19 सितंबर दोपहर 3:13 तक रहेगा। ऐसे में गणेश चतुर्थी उदयातिथि के अनुसार 19 सितंबर को धूमधाम से मनाया जाएगा। पूजा के शुभ मुहूर्त की बात करे तो 19 सितंबर को सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:26 तक रहेगा।

इस समय में भगवान गणेश की पूजा करना शुभ होगा। वहीं भगवान गणेश की विसर्जन की बात करे तो हिंदू कैलेंडर के अनुसार अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी पर्व का समापन 28 सितंबर गुरुवार को होगा।

गणेश चतुर्थी के क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को सभी देवी देवताओं में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। किसी भी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ, शादी विवाह, गृह प्रवेश आदि सभी शुभ कार्यो की शुरूआत भगवान गणेश की पूजा की जाती है। भगवान गणेश को शुभ कार्यों का देवता माना गया है। ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख – शांति की प्राप्ति होती है। साथ ही धन दौलत की वृद्धि होती है।

भगवान गणेश की विधि विधान से पूजन करने से घर में किसी प्रकार के क्लेश और कष्ट नहीं आता। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता भी कहा गया है। क्योंकि ये अपने सभी भक्तों सारे दुख को हर लेते हैं। भगवान गणेश को मोदक बहुत पसंद है। भगवान की सवारी मूषक है। भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक चढ़ाने से बहुत प्रसन्न होते हैं। भगवान गणेश को रिद्धि-सिद्धि के दाता कहा जाता हैं। उन्हें सिद्धि विनायक भी कहा गया है।

भगवान गणेश की पूजा सदियों से चली आ रही है, जो अब तक कायम है। अभी भी लोग भगवान गणेश की पूजा उतने ही हर्षो-उल्लास के साथ करते हैं जितना कि पहले करते थे। भगवान गणेश महादेव शिव और माता पार्वती के प्रिय पुत्र हैं।

कैसे करें भगवान गणेश की पूजा?
भगवान गणेश की पूजा करने से पहले भक्तों को विशेष ध्यान रखना पड़ता है। सबसे पहले भक्तों को स्नान ध्यान करना चाहिए। उसके बाद मन्दिर व घरों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थल पर शुद्ध करे। उसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करे। फिर उसके बाद उन्हें गंगा जल से अभिषेक करे।

भक्तों को उस दिन उपवास करना अत्यंत ही फलदायी होता है। इसके बाद भगवान गणेश के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। इसके बाद पुष्प, दूर्वा घास, सिंदूर, मोदक अर्पित करे। इसके बाद पूजा होने तक भगवान गणेश में ध्यान लगाएं।

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