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कौन है पटना के कुली धर्मा, जिनकी सुरक्षा में पुलिस रहती है तैनात?

by Rakesh Pandey
कौन है पटना के कुली धर्मा
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पटना : हम अक्सर नेताओं, VIP व्यक्तियों, खिलाड़ियों और बड़े अधिकारियों के साथ बॉडीगार्ड्स को देखते हैं, और यह एक सामान्य बात है। लेकिन क्या आप एक ऐसे शख्स के बारे में जानते हैं जिसकी कमाई 500 हो और बॉडीगार्ड 2। आज हम आपको एक कुली के बारे में बताते हैं जो रोजाना सिर्फ 500 रुपये कमाते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए हमेशा दो जवान हथियारों के साथ तैनात रहते हैं। यह व्यक्ति न किसी महत्वपूर्ण पद पर है, और न वह किसी विशेष खासियत के साथ आता है।

कौन है पटना के कुली धर्मा?

बिहार की राजधानी पटना में, जंक्शन पर लोगों का बोझ उठाने वाले इस कुली का नाम धर्मा यादव है। धर्मा भोजपुर जिले के हैं और वह 1989 से पटना जंक्शन पर कुली का काम करते आ रहे हैं। धर्मा कुली रोजाना अपने माथे पर यात्रियों के सामान का बोझ उठाने का काम करते हैं। लेकिन इस मामूली कुली की सुरक्षा के लिए हमेशा दो बॉडीगार्ड्स उनके साथ रहते हैं। ऐसे में आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि रोज 500 रुपये कमाने वाला ठीक से घर-परिवार नहीं चला पाता है, बच्चों की पढाई-लिखाई कराने में उसे परेशानी होती है तो यह कुली दो-दो बॉडीगार्ड कैसे मेंटेन करता है?

जानिए पूरा मामला

दरअसल बात उस समय की है जब वर्ष 2013 में 27 अक्टूबर को पटना में कई जगहों पर बम विस्फोट हुआ था। उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पटना में एक जन सभा को संबोधित करने आए थे, और इस सभा में भी बम विस्फोट हुआ था। इस सभा में कई बम फूटे लेकिन सभा स्थल गांधी मैदान में विस्फोट होने से पहले पटना जंक्शन के प्लेटफार्म संख्या 10 पर बम फटा था। इस विस्फोट में एक शख्स की जान भी चली गई थी।

इस भाग दौड़ में धर्मा ने अपनी बड़ी हिम्मत दिखाई थी। दरअसल इम्तियाज नाम का आतंकी जिसने यह बम विस्फोट कराया था उसे धर्मा ने ही पकड़ा था। बम विस्फोट के दौरान मौके पर मौजूद धर्मा यादव ने हिम्मत दिखाते हुए भागते आतंकी इम्तियाज को पकड़ लिया था। जिस वक्त धर्मा यादव ने आतंकी इम्तियाज को पकड़ा था, उस वक्त उस आतंकी ने अपने कमर में बम बांधे हुए था। इसके बाद जब उस आतंकी से पूछताछ शुरू हुई उसी समय मोदी के सभा के दौरान गांधी मैदान में विस्फोट शुरू हो गया। अगर धर्मा उस दिन आतंकी इम्तियाज को नहीं पकड़ता तो काफी लोगों की जान जा सकती थी।

ऐसे मिली बॉडीगार्ड की सुरक्षा

इस आतंकी घटना की जांच एनआईए को सौंपी गई। इस दौरान धर्मा कुली चश्मदीद गवाह बने। जांच में 9 आतंकी पकड़े गए थे। उन्होंने इस संघर्षपूर्ण परिस्थिति में बहादुरी दिखाई थी और एक आतंकी को जिंदा पकड़वाया, जिसके कारण उन्हें आतंकियों से धमकी मिलनी शुरू हो गई। तीन वर्षो बाद 2016 में, उनकी सुरक्षा के लिए रेलवे ने जीआरपी (जवान गार्ड) के रूप में एक जवान को तैनात किया। फिर इसी साल 2023 में बिहार सरकार ने धर्मा को बिहार पुलिस के एक जवान को बॉडीगार्ड के रूप में दे दिया।

50 लाख का मिला था ऑफर

धर्मा कुली के अनुसार, आतंकी समूह ने उनसे 50 लाख रूपए देने की बात की और इस आफर से गवाही से मुकरने के लिए कहा था। हालांकि, धर्मा कुली ने इस धमकी को नकार दिया था और आतंकियों के ऑफर को ठुकरा दिया था।

बॉडीगार्ड है धर्मा के पास, लेकिन रहने के लिए घर नहीं

कुली धर्मा ने बताया कि उसे सुरक्षाकर्मी तो मिले हुए हैं लेकिन, उनकी वजह से उसका काम प्रभावित होता है। जिसके कारण वह मुश्किल से 500 रूपए ही कमा पाते हैं। सुरक्षाकर्मी होने के बावजूद वे अपने काम के कारण अधिक परेशानी में हैं। धर्मा के पास अपना घर नहीं है। इस वजह से धर्मा कुली विश्राम गृह में रहते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जब उनके पास अपने रहने के लिए घर नहीं है, तो उनकी सुरक्षा कैसे हो सकती है।

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