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जी हां! मर्द को भी दर्द होता है, दहेज व एलुमनी की मार से वह पस्त होता है

मर्द को भी दर्द होता है! दहेज और एलुमनी के बीच पेंडूलम की तरह झूलता मर्द…

by Neha Verma
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केस 1- पेशे से जर्नलिस्ट, 10 लाख के सलाना पैकेज पर काम करने वाले विकास (बदला हुआ नाम) उस वक्त सदमे में आ गए, जब शादी के महज 6 महीने के अंदर ही उनकी वाइफ ने उनपर अननैचुरल सेक्स, दहेज और प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगा दिए। लड़की और परिवार वालों ने डिमांड किया कि 50 लाख रुपये देकर मामले को खत्म करे। एक साल तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर, सुनवाई के लिए हर महीने एक शहर से दूसरे शहर की दौड़भाग और वकील की मोटी फीस। आजिज आकर विकास ने 15 लाख में अपना केस सेटल करने की गुहार लगाई। तकरीबन ढेड़ साल बाद विकास अब इन सारी परेशानियों से छुटकारा मिला। हालांकि इस बीच उन्होंने न केवल अपना पैसा बहाया बल्कि नौकरी भी गंवा दी है।

केस 2- फैमिली बिजनेस चला रहे प्रमोद को अपना पुश्तैनी मकान बेचना पड़ गया क्योंकि एलुमनी में उनसे प्रॉपर्टी मांगी गई। दो साल की शादी में प्रमोद ने अपना घर गिरवी रख मकान का आधा पैसा पत्नी को दे दिया। अब वो किराए के घर पर मां-बाप के साथ रहते हैं। अब प्रमोद को शादी के नाम से चिढ़ है और उन्होंने फैसला लिया है कि वो अजीवन बिना शादी के रहेंगे।

केस 3- एक ही कंपनी में साथ काम करने वाले दंपत्ति ने जब अलगाव का फैसला किया, तो वाइफ ने सैलरी जानते हुए भी पति से 25 लाख की डिमांड रख दी। पति ने लोन लेकर मामले को सेटल किया है। ऑफिस में अपनी रेप्यूटेशन गवां चुके पति ने नौकरी छोड़ दी है और फ्रीलांस कर अपने घर का पालन-पोषण कर रहे हैं।

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर अतुल सुभाष के केस की जबरदस्त चर्चा है। अतुल द्वारा पोस्ट किए गए वीडियोज और डॉक्यूमेंट्स ने एक बार फिर जेंडर इक्वलिटी पर बहस छेड़ दी है। पिछले कुछ समय पर तमाम ऐसे केसेज सामने आए हैं, जहां महिलाओं ने अपनी राइट्स का गलत इस्तेमाल किया है। इन डेटा पर नजर डालें, तो कई ऐसी हैरान करने वाले केसेज हैं, जहां महिलाओं ने विक्टिम कार्ड खेलकर पति को इसका मोहरा बनाया है। हालांकि मामला इतना सेंसेटिव है, जो महिलाएं असल में पति द्वारा सताई जाती हैं या जिन पर दहेज का दवाब बनाया जाता है, उन्हें भी कहीं न कहीं शक भरी निगाहों से देखा जाता है। सोशल मीडिया पर चल रहे इस डिबेट पर पेश है एक रिपोर्ट…

कई अतुल और सुभाष हैं जो ‘अतुल सुभाष’ बनना चाहते हैं, मगर..

फेसबुक पर एक सज्जन ने अतुल सुभाष पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘असली नारीवाद तो तब है जब कोई नारीवादी ये कहने का जिगरा रखे कि मर्द को भी दर्द होता है और वो जान भी दे सकता है। बाद बाकी हर बार मर्द के आंसू घड़ियाली हों, यह जरूरी नहीं। और हां…अतुल सुभाष को सॉरी कहना बंद कीजिए…कई अतुल हैं, कई सुभाष हैं जो ‘अतुल सुभाष’ बनना तो चाहते हैं, लेकिन फंदे की गांठ के आगे जिम्मेदारियों की बेड़ियां कहीं ज्यादा मजबूत हैं। ‘इस पोस्ट का समर्थन कई मर्दों ने किया और खुद को इस स्थिति से रिलेट करते नजर आए। सवाल यह है कि क्या वाकई मर्दों के कंधे पर घर व परिवार चलाने का बोझ नहीं हो, तो उनके लिए सुसाइड करना आसान हो सकता है।

डराते हैं पुरुषों में बढ़ते सुसाइड के रेट्स!

पिछले कुछ सालों में पुरुषों द्वारा आत्महत्या का बढ़ता हुआ आंकड़ा देख लें, तो वाकई स्थिति डरावनी है। मर्दों में बढ़ते सुसाइड रेट्स की बेहद चिंताजनक हैं। 2021 में, भारत में 34.6% आत्महत्याएं पुरुषों द्वारा की गईं, जो महिलाओं की 13.1% दर के मुकाबले ढाई गुनी से भी अधिक है। पिछले सात सालों में पुरुषों द्वारा आत्महत्या में 33% का इजाफा हुआ है, 2014 में यह संख्या 89,129 थी, जो 2021 में बढ़कर 1,18,979 हो गई। पुरुषों में आत्महत्या की दर सबसे अधिक 30-45 वर्ष की एज ग्रुप में पाई गई है। आमतौर पर करियर, फाइनेंशियल रिस्पॉन्सिबिलिटी, भावनात्मक मार्गदर्शन की कमी की वजह से ऐसे कदम उठाए गए हैं।

क्या कहती है राष्ट्रीय पुरुष आयोग की रिपोर्ट

वहीं राष्ट्रीय पुरुष आयोग (NCM) ने रिपोर्ट किया है कि हर साल हजारों पुरुष झूठे दहेज आरोपों का सामना करते हैं। NCM के अनुसार, झूठे दहेज और घरेलू हिंसा के आरोपों से संबंधित मामलों में पुरुषों की संख्या में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है। झूठे मामलों की बढ़ती संख्या ने पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाला है, और आत्महत्याओं से यह जुड़ा हुआ है। 2014 के एक अध्ययन के अनुसार, भारत में पुरुषों की 25% आत्महत्याएं पारिवारिक विवादों के कारण हुई हैं, जिनमें झूठे दहेज उत्पीड़न के आरोप भी शामिल हो सकते हैं।

क्या बढ़ रहे हैं झूठे दहेज के केस

पुरुषों को दहेज से जुड़े झूठे मामलों में फंसने का मुद्दा भारत में एक बढ़ती हुई चिंता बन चुका है। हालांकि, इस मामले में पुरुषों की संख्या का सही और विस्तृत आंकड़ा प्राप्त करना मुश्किल है, क्योंकि सभी मामले सामने नहीं आते हैं या सरकारी आंकड़ों में ठीक से दस्तावेजित नहीं होते। फिर भी, कई रिपोर्ट और अध्ययन इस स्थिति पर कुछ महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) डेटा के अनुसार, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के तहत दहेज से जुड़े मामलों की संख्या लगातार बढ़ते जा रहे हैं, 2021 में, 1,24,132 दहेज उत्पीड़न के मामले धारा 498A के तहत दर्ज किए गए, लेकिन इन मामलों में अक्सर यह फर्क नहीं किया जाता कि आरोप सच्चे हैं या झूठे।

झूठे मामलों पर रिसर्च और रिपोर्टे्स

विभिन्न अध्ययन और रिपोर्टें यह सुझाव देती हैं कि दहेज से संबंधित मामलों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा झूठे आरोपों से संबंधित हो सकता है। कुछ अनुमान बताते हैं कि 50% से 70% दहेज उत्पीड़न के मामले झूठे हो सकते हैं, जो पुरुषों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं के सर्वेक्षण और अनुभवों पर आधारित हैं। 2019 में गृह मंत्रालय द्वारा किए गए एक सर्वे में पाया गया कि धारा 498A के दुरुपयोग के कारण 25% पुरुष झूठे दहेज मामलों में फंसाए जाते हैं।

एक पुरुषों के अधिकारों के लिए काम करने वाली एनजीओ Save Indian Family Foundation (SIFF) द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार, 60% से अधिक पुरुष जो दहेज उत्पीड़न के झूठे आरोपों में फंसे हुए हैं, वे मानसिक तनाव, प्रतिष्ठा की हानि और लंबे कानूनी संघर्षों के कारण आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन आंकड़ों से इस समस्या की गंभीरता का पता चलता है, लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि झूठे दहेज मामलों में फंसे पुरुषों की सही संख्या का अनुमान लगाना मुश्किल है। न्यायिक सुधारों की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कानूनी प्रणाली दोनों पुरुषों और महिलाओं के लिए निष्पक्ष रूप से काम करे।

झूठे मामलों में फंसे पुरुषों के लिए क्या है कानूनी विकल्प?

भारत में दहेज और उससे जुड़ी प्रताड़ना को लेकर सख्त कानून बनाए गए हैं, लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं है कि इन कानूनों का गलत इस्तेमाल किया गया है। कई बार तो झूठे केसेज भी तैयार किए जाते हैं। ऐसे में क्या झूठे चार्जेस झेल रहे पुरुषों के लिए कोई कानून व्यवस्था है। तो जवाब है, हां..अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ जानबूझकर झूठा मुकदमा दायर किया गया है, तो यह IPC की धारा 211 के तहत दंडनीय है। इसके तहत दो साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। अगर मामला गंभीर है, जैसे कि किसी ऐसे अपराध के तहत झूठा मामला दायर किया गया जिसमें फांसी या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है, तो आरोपित को सात साल तक की सजा हो सकती है।

वहीं दूसरा, अगर कोई व्यक्ति न्यायालय में झूठी गवाही देता है, तो उसे IPC की धारा 193 के तहत सात साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। तीसरा मानहानि का दावा: IPC की धारा 499 और 500 के तहत, यदि किसी व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को झूठे आरोपों से नुकसान पहुंचा है, तो वह मानहानि का मुकदमा दायर कर सकता है। इस मामले में आरोपी को दो साल तक की सजा हो सकती है।

पैसे कमाने का जरिया है डिवोर्स?

अपनी बीवी एलुमनी की पेंच पर फंसे विकास का कहना है, इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अब डिवोर्स जैसी चीज भारत में आसान तरीके से पैसा कमाने की मशीन बनती जा रही है। कई महिलाएं इसका इस्तेमाल पति से मोटे रकम ऐंठने के लिए कर रही हैं। आप खुद ही देखें, इस पूरे तलाक के प्रॉसेस में बहुत से बिचौलियों को भी फायदा होता है। अमेरिका में डिवॉर्स में होने वाले बिजनेस की तुलना हॉलीवुड से की जाती है,जिसमें यह माना जाता है कि तलाक बिजनेस का मूल्यांकन हॉलीवुड से भी बड़ा है। भारत भी इसी दिशा में बढ़ रहा है।

पेशेवर/भूमिकाविवरण
वकीलतलाक वकील इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके द्वारा लिए गए शुल्क इस उद्योग का एक बड़ा हिस्सा होते हैं।
जजअदालतें और न्यायधीश लगातार तलाक के मामलों को निपटाने से लाभान्वित होते हैं, जो उनके काम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
मेडियॉकर (सुलहकर्ता)ये पेशेवर मामलों में मध्यस्थता करते हैं और पक्षों के बीच समझौते के लिए नियुक्त किए जाते हैं। इनके द्वारा किए गए काम के लिए शुल्क लिया जाता है।
अदालत के क्लर्क व जज के स्टाफअदालत के क्लर्क मामले की तेजी से प्रक्रिया करने, दस्तावेजों तक पहुंचने या अन्य कार्यों के लिए एक्स्ट्रा कमाई लेते हैं।
पुलिसकुछ तलाक मामलों में पुलिस की जरूरत पड़ती है, खासकर जब घरेलू हिंसा या बच्चों की कस्टडी से जुड़ा मामला हो।
काउंसलर और थैरेपिस्टतलाक के मानसिक और भावनात्मक प्रभाव से निपटने के लिए कई लोग काउंसलिंग और थैरेपी सेवाओं का उपयोग करते हैं जिससे यह पेशा भी प्रॉफिटेबल बनाता है।
फॉरेंसिक एक्सपर्टतलाक के मामलों में अक्सर संपत्ति का सही मूल्यांकन और पैसों की सच्चाई का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक एक्सपर्ट की मदद ली जाती है।
अकाउंटेंटफॉरेंसिक ऑडिट करके संपत्ति, आय या छुपी हुई संपत्ति का पता लगाने में अकाउंटेंट की सेवाएं ली जाती हैं, जो समझौते में मदद करती हैं।
संपत्ति छिपाने वाले नेटवर्ककुछ लोग अपनी संपत्ति को छिपाने के लिए एक्सपर्ट्स की मदद लेते हैं ताकि तलाक में उनका संपत्ति बंटवारे से बच सके।
उधार देनेवालेतलाक की प्रक्रिया में कई बार लोग उधार लेते हैं, खासकर जब उन्हें लंबे कानूनी संघर्ष के दौरान खर्चों को पूरा करने की आवश्यकता होती है।
झूठे गवाहकुछ तलाक के मामलों में झूठे गवाहों को नियुक्त किया जाता है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके, जिससे कुछ लोग इससे लाभ उठाते हैं।

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