सेंट्रल डेस्क : यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध ने वैश्विक राजनीति में गहरा असर डाला है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की, जो कभी अमेरिका के सबसे प्रिय नेता माने जाते थे, आज आलोचना के केंद्र में हैं। अमेरिका के समर्थन से शुरू हुई उनकी यात्रा अब आलोचनाओं और असमर्थता के दौर में पहुंच गई है। अमेरिका का प्रिय नेता थे जेलेंस्कीफरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद, अमेरिका ने खुलकर यूक्रेन का समर्थन किया था। जेलेंस्की ने अमेरिका की यात्रा कर राष्ट्रपति जो बाइडन से मुलाकात की, जहां बाइडन ने उन्हें “साल का सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति” करार दिया। इसके अलावा, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने भी जेलेंस्की के नेतृत्व और साहस की सराहना की। बाइडन ने जून 2024 में कहा था, “हम यूक्रेन के साथ तब तक रहेंगे जब तक वे इस युद्ध में जीत हासिल नहीं कर लेते।” अमेरिका ने यूक्रेन को भारी सैन्य सहायता और आर्थिक मदद दी, लेकिन इसके बावजूद युद्ध का कोई निर्णायक अंत नजर नहीं आया।

पश्चिमी देशों का बदलता रुख
समय के साथ पश्चिमी देशों का नजरिया बदलने लगा। अमेरिका में चुनावी माहौल और आर्थिक दबावों के कारण यूक्रेन को मिलने वाला समर्थन कम होने लगा। जेलेंस्की की नीतियों पर सवाल उठने लगे और उन पर तानाशाही के आरोप भी लगाए गए।यूरोपीय यूनियन और नाटो सदस्यता की उम्मीदों पर भी पानी फिरता नजर आया। रूस की सख्त नाराजगी के बावजूद जेलेंस्की ने पश्चिम का साथ दिया, लेकिन अब वही देश यूक्रेन से दूरी बनाने लगे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का आक्रामक रुख
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जेलेंस्की के मुखर आलोचक बन गए हैं। उन्होंने ट्रूथ सोशल पर लिखा, “एक मामूली कॉमेडियन ने अमेरिका से 350 बिलियन डॉलर खर्च करवा दिए एक ऐसे युद्ध में, जिसे कभी जीतना मुमकिन ही नहीं था।”ट्रंप ने जेलेंस्की पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए, यह कहते हुए कि यूक्रेन को दी गई आर्थिक मदद का आधा हिस्सा “गायब” हो गया। इसके अलावा, उन्होंने जेलेंस्की को “तानाशाह” करार दिया क्योंकि वह चुनाव कराने से इनकार कर रहे हैं और यूक्रेन में उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई है।
यूक्रेन की असफल रणनीति और भविष्य
जेलेंस्की की रणनीतियों पर अब उनके अपने देश में भी सवाल उठने लगे हैं। नाटो और यूरोपीय यूनियन की सदस्यता जैसे सपने अब अधूरे रह गए हैं। रूस के साथ युद्ध में भारी नुकसान झेलने के बावजूद कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकला। डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही संकेत दिया था कि अगर वह दोबारा राष्ट्रपति बने तो यूक्रेन को मिलने वाला अमेरिकी समर्थन कम कर सकते हैं। उन्होंने यूक्रेन के नाटो में शामिल होने की संभावना को भी “अव्यावहारिक” बताया था।वलोडिमिर जेलेंस्की का सफर एक प्रेरक नेता से विवादित राजनेता तक का बन गया है। अमेरिका और पश्चिमी देशों का बदलता रुख यूक्रेन के भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। जहां कभी जेलेंस्की को लोकतंत्र का रक्षक कहा जाता था, वहीं आज उन्हें तानाशाही प्रवृत्ति वाला नेता करार दिया जा रहा है।
Read also – Blast in Israel : इजरायल में तीन बसों में सिलसिलेवार बम विस्फोट, हमास के चरमपंथियों का हाथ होने का संदेह

