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Asian Games 2023: बैडमिंटन में रजत से भारत को करना पड़ा संतोष, चीन ने जीता गोल्ड

by Rakesh Pandey
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स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम को एशियाई खेल (Asian Games 2023) के फाइनल में हार का सामना करना पड़ा है। भारतीय खिलाड़ी एच एस प्रणय की चोट से भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम पर असर साफ नजर आया और भारत को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। प्रणय के टीम में न होने की कमी उनकी टीम व भारत को खली।

2-0 से बढ़त के बाद 3-2 से करना पड़ा हार का सामना

आपको बता दें कि लक्ष्य सेन ने पहला एकल और सात्विक साईराज रैंकिरेड्डी और चिराग शेट्टी ने युगल मैच जीतकर भारत को 2-0 की बढ़त दिलाई थी। शुरूआती दो मैच जीतने के बाद भी चीन के हाथों फाइनल में 2-3 से हार का सामना करना पड़ा। भारत को इस खेल में रजत पदक प्राप्त हुआ। दुनिया के सातवें नंबर के खिलाड़ी प्रणय, कमर की चोट के कारण नहीं खेल सके, लेकिन भारतीय टीम ने उनकी अनुपस्थिति में भी काफी अच्छा प्रदर्शन किया।

लय को कायम नहीं रख से किदाम्बी श्रीकांत

पिछले दो मैच जीतने के बाद दारोमदार किदाम्बी श्रीकांत पर था, जिन्होंने दक्षिण कोरिया के खिलाफ सेमीफाइनल में उम्दा प्रदर्शन किया था। इस बार वह उस लय को कायम नहीं रख सके और हार गए। चीन ने बाकी दोनों मैच जीतकर अपना दबदबा बरकरार रखा। सेन ने दुनिया के छठे नंबर के खिलाफ पहला मैच खेलते समय शियुकी को 22-20, 14-21, 21-18 से मात दी। इसके बाद, दुनिया की तीसरे नंबर की जोड़ी सात्विक और चिराग ने दुनिया की दूसरी नंबर की जोड़ी लियांग वेइ केंग और वांग चांग को 21-15, 21-18 से हराया।

ऑल इंग्लैंड चैंपियन से हारे श्रीकांत

श्रीकांत को आल इंग्लैंड चैम्पियन लि शिफेंग ने 24-22, 21-9 से हराया। दूसरे युगल मुकाबले में ध्रुव कपिला और साइ प्रतीक कृष्णा प्रसाद ने दुनिया की आठवें नंबर की जोड़ी लियू यू चेन और यु शुआन यि को 21-6, 21-15 से मात दी। इस हार के बावजूद, भारतीय बैडमिंटन टीम ने शानदार प्रदर्शन किया है और बैडमिंटन में दूसरा रजत पदक जीतकर देश का गर्व बढ़ाया है।

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एशियन गेम्स में कई पदक हैं शटलरों के नाम

पीवी सिंधु ने इससे पहले 2018 में महिला एकल में रजत पदक जीता था। वहीं भारतीय बैडमिंटन पुरुष टीम प्रकाश पादुकोण और विमल कुमार ने इससे पहले 1986 में सियोल में पदक जीता था। इस शानदार प्रदर्शन ने भारतीय बैडमिंटन को नया उत्साह और संजीवनी शक्ति दी है, और ये दिखाता है कि हमारे खिलाड़ी अपने प्रतियोगिता में उन्नति पाने के लिए पूरी तरह से समर्पित हैं। यह रजत पदक भी भारतीय बैडमिंटन के उज्जवल भविष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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