हेल्थ डेस्क, जमशेदपुर : देशभर में आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़े के मामले सामने आने के बाद अब जमशेदपुर में भी इसकी जांच गहराई से की जा रही है। इस मामले में शहर के जमशेदपुर आई हॉस्पिटल सहित कुल आठ निजी नर्सिंग होमों को शोकॉज किया गया है और निर्धारित समय के अंदर जवाब देने को कहा गया है। ताकि आगे की कार्रवाई की जा सकें। झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के अपर कार्यकारी निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने सभी अस्पतालों को पत्र भेजकर जवाब मांगा है। इसका प्रतिलिपि जिले के सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी को भी भेजा गया है। सिविल सर्जन ने कहा कि सभी को तय समय के अंदर जवाब देने का निर्देश दिया गया है।
कार्यकारी निदेशक के पत्र में क्या है?
झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के अपर कार्यकारी निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने अस्पतालों द्वारा किए गए कुल 61 दावों को संदिग्ध माना है। वहीं, स्टेट एंटी फ्राड यूनिट ने भी उक्त सारे दावों को फ्राड केस के रूप में चिह्नित किया है। ऐसे में इससे संबंधित जवाब निर्धारित समय के अंदर देना होगा। अगर विभाग जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ तो फिर उन अस्पतालों के खिलाफ जुर्माना लगाया जा सकता है। इन सभी अस्पतालों से 61 संबंधित मरीजों के इलाज व भुगतान संबंधित जानकारी मांगी गई है।
इन अस्पतालों को किया गया शोकॉज
झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के अपर कार्यकारी निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज द्वारा भेजे गए पत्र में जमशेदपुर आई हॉस्पिटल, काशीडीह स्थित डॉ. अभिषेक चाइल्ड केयर मेटरनिटी अस्पताल, भिलाई पहाड़ी स्थित सेंट जोसेफ अस्पताल, साकेत आर्थोस्पाइन केयर एंड मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, कांतिलाल गांधी मेमोरियल अस्पताल, गंगा मेमोरियल अस्पताल, लक्ष्मी नर्सिंग होम व सिंह नर्सिंग होम का नाम शामिल है। इन सभी को निर्धारित समय के अंदर जवाब मांगा गया है।
झारखंड के अस्पतालों से वसूला गया एक करोड़ रुपये का जुर्माना
झारखंड में आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अभी तक 89 हॉस्पिटलों से करीब एक करोड़ रुपये जुर्माना वसूला गया है, जबकि 250 से भी ज्यादा हॉस्पिटलों को शो-कॉज किया गया है।
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मध्यप्रदेश में भी फर्जीवाड़ा का मामला
मध्य प्रदेश में भी बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 447 मरीज जिनकी अस्पताल में भर्ती हुए बिना ही मौत हो गई, इन मरीजों के लिए भी 1.2 करोड़ की राशि क्लेम की गई। एक ही मरीज का एक ही समय में एक साथ कई अस्पतालों में इलाज किया गया।

