सेंट्रल डेस्क : बटला हाउस एनकाउंटर में आरोपी आरिज खान को अब फांसी नहीं होगी। आरिज खान के खिलाफ फांसी की सजा की मांग को दिल्ली हाई कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है। इस केस में दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की हत्या कर दी गई थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपी को फांसी की बजाय आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने घटना के समय बीटेक के 23 वर्षीय छात्र रहे खान को सुनाई गई फांसी की सजा की पुष्टि करने से इनकार करते हुए कहा कि इस अदालत की सुविचारित राय है कि सश्रम आजीवन कारावास की सजा उचित होगी।
प्रतिष्ठित पुलिस अधिकारी को खो दिया
विशेष लोक अभियोजक राजेश महाजन ने कहा था कि एक वर्दीधारी पुलिस अधिकारी की हत्या दुर्लभ से दुर्लभतम मामला है। दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले को लेकर कहा कि वर्तमान परिस्थितियां इसे दुर्लभतम मामले की श्रेणी में डालने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि घटना के दौरान देश ने एक प्रतिष्ठित पुलिस अधिकारी को खो दिया, जिन्होंने कर्तव्य के प्रति अपने जीवन का बलिदान दिया, और उनके योगदान को राष्ट्र कभी नहीं भूलेगा।
पुलिस अधिकारी की हत्या का कोई रिकॉर्ड नहीं
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अमित शर्मा की पीठ ने निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें खान को पुलिस अधिकारी की हत्या का दोषी ठहराया गया था। अदालत ने कहा कि गवाहों के बयानों और अन्य सामग्री से उसकी मौजूदगी घटनास्थल पर होने की बात साबित होती है और उसके मौके से फरार होने के दौरान अधिकारियों पर गोली चलाने की बात भी साबित होती है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने कहा कि यह साबित करने के लिए रिकॉर्ड में कुछ नहीं है कि अधिकारी को लगी गोली के लिए किसी आरोपी विशेष को जिम्मेदार ठहराया जा सके। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि दिवंगत इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की मौत के लिए किसी विशेष आरोपी को जिम्मेदार ठहराने के लिए रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में हम यह मानते है कि मामले में चश्मदीद की गवाही और अन्य साक्ष्य घटना स्थल पर आरिज़ खान की उपस्थिति और मौके से भागते समय छापेमारी दल पर गोलीबारी के तथ्य को स्थापित करती है।
जुर्माना राशि को 11 लाख कम किया
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने लिखित आदेश में कहा कि आरिज़ खान की वहां मौजूदगी की दिल्ली पुलिस को पहले से कोई सूचना नहीं थी। आरिज़ खान मामले में संदिग्ध नहीं था ना ही उसके खिलाफ मामले में जांच चल रही थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि आरिज़ खान पहले किसी मामले में दोषी नहीं करार दिया गया हैं, उसके खिलाफ मामले अभी लंबित हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा आरिज़ खान पर लगाए गई जुर्माना राशि 11 लाख को कम कर दिया।
कौन है आरिज खान?
आरिज खान वर्ष 2008 में भारत के कई शहरों, जैसे कि दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, और उत्तर प्रदेश के यूपी क्षेत्र के अदालतों में आयोजित धमाकों का प्रमुख साजिशकर्ता था। इन धमाकों में 165 लोगों की मौके पर मौके पर मौत हो गई थी और 535 लोग घायल हो गए थे। आरिज खान का मूल नाम जुनैद है और वह उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ शहर का रहने वाला है। स्पेशल सेल की टीम ने फरवरी 2018 में आरिज खान को गिरफ्तार किया था।
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2008 में हुआ बाटला हाउस एनकाउंटर
सितंबर 2008 में, भारत की राजधानी दिल्ली के जामिया नगर इलाके में स्थित बाटला हाउस में एक भयंकर एनकाउंटर हुआ, जिसमें दिल्ली पुलिस और भारतीय मुजाहिदीन संगठन के सदस्यों के बीच जबरदस्त संघर्ष शुरू हो गया। इस एनकाउंटर के परिणामस्वरूप, इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा शहीद हो गए और कई अन्य लोग घायल हो गए। इस घटना में आरिज खान और उसके साथी शहजाद अहमद सफल हुए क्योंकि वे बाटला हाउस से बचकर बाग गए थे। जबकि उनके दो साथी आतिफ आमीन और मोहम्मद साजिद की मौके पर मौके पर मौत हो गई। इस मामले में, दिल्ली पुलिस ने आरिज और उनके साथी के खिलाफ मामला दायर किया और उन्हें आतंकवाद के अधीन कई गंभीर आरोपों में दोषी पाया।

