

अहमदाबाद : गुजरात की एक मेट्रोपोलिटन कोर्ट ने मंगलवार को Congress Leader Jignesh Mevani और 30 अन्य को 2017 के एक मामले में बरी कर दिया है। इन पर राज्य सरकार की नीतियों के विरोध में ट्रेन रोकने का आरोप लगाया गया था। आरोप था कि Congress Leader Jignesh Mevani ने गैरकानूनी तरीके से इकट्ठे होकर कालूपुर रेलवे स्टेशन पर राजधानी एक्सप्रेस को रोका था, जो अहमदाबाद से नई दिल्ली जा रही थी।

Congress Leader Jignesh Mevani के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा के तहत भी था केस दर्ज
मामले में Congress Leader Jignesh Mevani और अन्य पर आईपीसी की धारा 143 (गैरकानूनी सभा), 147 (दंगा), 149 (सामान्य वस्तु गैरकानूनी सभा), 332 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 336 (लोक सेवक को कर्तव्यों से रोकना) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया था। मेवाणी पर रेलवे अधिनियम की धारा 153 के तहत भी मामला दर्ज किया गया था, जो लापरवाही भरे कृत्य से रेल यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालने से संबंधित है।

सभी 31 आरोपियों को कोर्ट ने किया बरी
अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पीएन गोस्वामी की अदालत ने मामले के सभी 31 आरोपियों को बरी कर दिया, जिनमें 13 महिलाएं भी शामिल थीं। आरोपियों को ‘संदेह का लाभ’ देते हुए मेट्रोपोलिटन कोर्ट से बरी कर दिया है। मामले के अनुसार, 11 जनवरी, 2017 को Congress Leader Jignesh Mevani और अन्य ने अहमदाबाद के कालूपुर रेलवे स्टेशन पर एक राजधानी ट्रेन को लगभग 20 मिनटों तक रोक दिया था। आरोप था कि प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन के इंजन पर चढ़ कर और रेलवे ट्रैक पर लेटकर ट्रेन के मार्ग को बाधित कर दिया था।

Congress Leader Jignesh Mevani के बरी होने पर कांग्रेसी हैं खुश
मेवाणी के वकील गोविंद परमार ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपों को सही साबित करने में विफल रहे। उन्होंने कहा कि मेवाणी और साथ के अन्य प्रदर्शनकारियों ने केवल शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया था। मेवाणी के बरी होने पर कांग्रेस ने खुशी जताई है। पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि यह फैसला मेवाणी की जीत है और यह दिखाता है कि न्याय व्यवस्था सही दिशा में काम कर रही है।
Jignesh Mevani हैं वडगाम के विधायक
मेवाणी एक दलित नेता हैं और वह कांग्रेस के टिकट पर वडगाम सीट से चुनावी मैदान में उतरे थे और उन्होंने अपनी जीत दर्ज की थी। वे गुजरात में सामाजिक न्याय और अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहे हैं। उन्हें अक्सर सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए गिरफ्तार किया जाता रहा है।
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