फीचर डेस्क : सूर्य उपासना का पर्व चार दिवसीय छठ पूजा शुक्रवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही संपन्न हो गया। पटना, मुजफ्फरपुर, जमेशदपुर, रांची और गया सहित सभी जगहों पर नदियों, तालाबों पर बने घाट पर जाकर व्रतियों ने भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया। गया जिले के डुमरिया प्रखंड के मैगरा गांव में सोरहर नदी के किनारे बने छठ घाट पर छठ व्रतियों ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर छठ संपन्न किया। छठ पूजा के चौथे दिन उगते सूर्य यानी उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ व्रतियों ने 36 घंटे का अपना निर्जला उपवास का पारण किया। सभी के बीच ठेकुआ-केला प्रसाद का वितरण किया गया। बता दें, उदीयमान सूर्य देने के पीछे पौराणिक मान्यताएं हैं। मान्यताओं के अनुसार सूर्य षष्ठी का व्रत आरोग्य की प्राप्ति, सौभाग्य और संतान के लिए रखा जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार, राजा प्रियंवद ने भी छठ व्रत रखा था। उन्हें कुष्ठ रोग हो गया था। इस रोग से मुक्ति के लिए भगवान भास्कर ने भी छठ व्रत किया था।
सभी जगहों पर छठ पूजा का उल्लास इस वर्ष भी अत्यधिक धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व केवल भारतीयों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों ने भी इस अद्भुत धार्मिक अनुष्ठान में अपनी भागीदारी दिखाई। विशेष रूप से बोधगया में इस बार छठ पूजा का विदेशी मेहमानों के बीच खासा आकर्षण देखा गया। ऑस्ट्रिया और मलेशिया से आए पर्यटकों ने छठ घाटों पर जाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जो इस पर्व की व्यापकता और महत्व को साबित करता है।
विदेशी पर्यटकों ने लिया छठ पूजा में भाग
बोधगया विश्वभर में एक महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। इस बार छठ पूजा के दौरान एक और दिलचस्प पहलू से सजा हुआ था। यहां हजारों विदेशी पर्यटक पहुंचे थे, जिन्होंने न केवल भारतीय संस्कृति और आस्था की गहराई को समझा, बल्कि स्वयं भी इस पवित्र पर्व में भाग लिया। इन विदेशी मेहमानों ने पारंपरिक श्रद्धा के साथ छठ पूजा के धार्मिक अनुष्ठानों को निभाया। सिर पर सूप रखकर, भगवा वस्त्र धारण कर और सूर्य देवता को अर्घ्य देकर उन्होंने भारतीय सनातनी आस्था का सम्मान किया।
विदेशी मेहमानों की श्रद्धा और आस्था
विदेशी पर्यटकों ने कहा कि वे भारतीय संस्कृति और विशेष रूप से सूर्य देवता के प्रति भारतीयों की अद्भुत आस्था से प्रभावित हुए हैं। एक विदेशी मेहमान ने कहा कि हमने इस पर्व के बारे में बहुत सुना था, लेकिन इसे यहां आकर महसूस किया। सूर्य के प्रति भारतीयों की श्रद्धा और भक्ति के स्तर को देखकर हम सचमुच हैरान हैं। यही वजह है कि हमने भी इस पर्व में हिस्सा लिया और सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया।
अनेक पर्यटकों ने बताया कि उनका अनुभव बहुत ही अद्वितीय था। उन्हें भारतीय परंपराओं और संस्कृति के बारे में गहरे से समझने का मौका मिला और छठ पूजा ने उन्हें भारतीयों की धार्मिक भावना को करीब से महसूस करने का अवसर प्रदान किया।
छठ पूजा : सूर्य के प्रति आस्था का अद्वितीय पर्व
भारत में छठ पूजा का महत्व सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं है, बल्कि यह समाज और संस्कृति के एक अभिन्न हिस्से के रूप में माना जाता है। इस पर्व के जरिए लोग न केवल सूर्य देवता की पूजा करते हैं, बल्कि यह भी संदेश देते हैं कि प्रकृति और उसके नियमों के साथ समन्वय स्थापित करना आवश्यक है। छठ पूजा का यह पारंपरिक रूप जहां एक ओर भारतीय समाज की गहरी सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाता है, वहीं विदेशी पर्यटकों के लिए एक नई आस्था और विश्वास की खोज बन जाता है।

