रामगढ़ : झारखंड की रामगढ़ विधानसभा सीट इन दिनों एक चुनावी अखाड़ा बन चुकी है। यह सीट भले ही फिल्म “शोले” से जुड़ी रामगढ़ नहीं है, लेकिन यहां चुनावी दंगल में एनडीए और इंडिया गठबंधन के लिए यह सीट एक “शोले” की तरह बन गई है। दोनों मुख्य गठबंधन – एनडीए और इंडिया, को यहां अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए भारी मेहनत करनी पड़ रही है।

जेएलकेएम उम्मीदवार ने बनाई मुश्किलें
इस सीट पर मुकाबला इतना कड़ा है कि जेएलकेएम (झारखंड लोकसमाज पार्टी) के उम्मीदवार ने चुनावी माहौल को बदलकर रख दिया है। पनेश्वर महतो, जिनकी पार्टी अब रामगढ़ में सक्रिय हो गई है, ने दोनों प्रमुख दलों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
एनडीए और इंडिया दोनों के लिए अहम है रामगढ़
रामगढ़ सीट पर एनडीए उम्मीदवार सुनीता चौधरी और इंडिया गठबंधन की ममता देवी दोनों ही अपनी जीत के लिए जी-जान से मेहनत कर रही हैं। एक तरफ जहां एनडीए की ओर से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सुनीता चौधरी के पक्ष में पूरी ताकत झोंकी है, वहीं दूसरी तरफ ममता देवी के लिए कांग्रेस के सलाहकार गुलाम अहमद मीर और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मैदान में हैं।
रामगढ़ सीट चंद्र प्रकाश चौधरी के लिए बेहद अहम है, क्योंकि वह इस क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके हैं। 2019 में जब उन्होंने गिरिडीह से सांसद बनने के बाद इस सीट को अपनी पत्नी सुनीता चौधरी के लिए छोड़ा था, तो ममता देवी ने उन्हें यहां करारी शिकस्त दी थी। लेकिन इस हार का बदला चंद्र प्रकाश चौधरी ने उपचुनाव में लिया, जब उन्होंने अपनी पत्नी को विजयी बनाकर सीट को वापस जीता लिया।
ममता देवी की निजी लड़ाई
ममता देवी के लिए यह चुनाव सिर्फ एक राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि यह उनके पति की हार का बदला लेने की एक अहम कोशिश भी है। ममता देवी ने 2019 में रामगढ़ सीट पर चंद्र प्रकाश चौधरी को हराया था, लेकिन कुछ सालों बाद आईपीएल गोली कांड में उनके खिलाफ फैसले के बाद उनकी सदस्यता चली गई। अब एक बार फिर, ममता देवी अपनी हार का बदला लेने के लिए पूरी ताकत से मैदान में हैं।
जेएलकेएम की बढ़ती ताकत
रामगढ़ में जेएलकेएम पार्टी का प्रभाव भी बढ़ता जा रहा है, खासकर पनेश्वर महतो की सक्रियता से। पनेश्वर महतो, जिन्हें क्षेत्र में बेरोजगार पानेश्वर के नाम से जाना जाता है, अपने चुनावी प्रचार में गांव-गांव जा रहे हैं। गोला, दुलमी, और चितरपुर जैसे प्रखंडों में उनकी जबरदस्त पकड़ है, और युवाओं का समर्थन भी उनके साथ बढ़ रहा है। अगर यह जन सैलाब वोट में तब्दील हो जाता है, तो वह सुनीता चौधरी या ममता देवी की जीत को मुश्किल बना सकता है।
चुनावी समर का निर्णायक मोड़
रामगढ़ में अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि किस पार्टी का उम्मीदवार किसे हराने में कामयाब होता है। एक ओर जहां चंद्र प्रकाश चौधरी और उनकी पत्नी सुनीता चौधरी हर तरह की मेहनत और रणनीति का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं ममता देवी भी अपनी जीत के लिए हर कदम उठा रही हैं। दूसरी तरफ, जेएलकेएम के पनेश्वर महतो की बढ़ती लोकप्रियता से मुकाबला और भी रोमांचक बनता जा रहा है।

