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‘मिथिलांचल को बांग्लादेश बनाना चाहती हैं राबड़ी देवी’, अलग राज्य की मांग पर भड़के BJP विधायक

बीजेपी विधायक का कहना है कि राबड़ी देवी और उनकी पार्टी का यह कदम राज्य की सामाजिक और धार्मिक स्थिति को अस्थिर करने की कोशिश हो सकता है। हालांकि, आरजेडी और राबड़ी देवी ने इसे बिहार के विकास के लिए एक जरूरी कदम बताया है।

by Rakesh Pandey
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पटना: बिहार की सियासत में इन दिनों एक नए विवाद ने तूल पकड़ लिया है, जब बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने मिथिला क्षेत्र के लिए अलग राज्य बनाने की मांग की। इस बयान ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। राबड़ी देवी के बयान के बाद से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

BJP विधायक ने उठाए सवाल

मधुबनी जिले की बिसफी विधान सभा सीट से बीजेपी के विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने राबड़ी देवी की इस मांग पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राबड़ी देवी और उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) दरअसल वोट बैंक की राजनीति कर रही हैं और मिथिलांचल को बांग्लादेश बनाने की मंशा रखती हैं। उनका आरोप था कि आरजेडी का उद्देश्य मुस्लिम तुष्टिकरण करना है, और इसी कारण वह इस तरह की मांग कर रही हैं।

‘मिथिलांचल को बांग्लादेश बनाना चाहती हैं राबड़ी’

बीजेपी विधायक ने कहा, “आरजेडी और राबड़ी देवी का इरादा धीरे-धीरे साफ हो जाएगा। उनकी असल मंशा मुस्लिम तुष्टिकरण करना है। वे मिथिलांचल को बांग्लादेश बनाना चाहती हैं। उन्हें यह लगता है कि अगर मिथिलांचल अलग राज्य बनेगा, तो इसमें अररिया, कटिहार और किशनगंज जैसे जिले शामिल होंगे, जहां मुस्लिम आबादी का प्रतिशत बढ़ चुका है।”

उन्होंने यह भी कहा कि इन क्षेत्रों में वोट बैंक का असंतुलन पैदा हुआ है, और यह असंतुलन आरजेडी के लिए फायदेमंद हो सकता है, जो अपनी तुष्टिकरण की नीति के तहत यह बयान दे रही है।

धार्मिक असंतुलन का आरोप

हरिभूषण ठाकुर ने आगे यह भी कहा कि 1952 के बाद से इन क्षेत्रों में जनसंख्या असंतुलन बढ़ा है, और इसका मुख्य कारण बांग्लादेशी घुसपैठिए और रोहिंग्या मुसलमानों की बढ़ती संख्या है। उन्होंने कहा, “अररिया, किशनगंज, कटिहार, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, मोतिहारी और बेतिया जैसे क्षेत्रों में धार्मिक असंतुलन का खतरा बढ़ गया है, जो राज्य की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।”

विधायक ने इसे इस्लामिक स्टेट (ISIS) जैसे वैश्विक खतरे से जोड़ते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में बढ़ते धार्मिक असंतुलन से खतरे का स्तर भी बढ़ सकता है।

राबड़ी देवी का बयान

दरअसल, राबड़ी देवी ने बुधवार को बिहार विधान परिषद में यह कहा था कि मैथिली भाषा में संविधान का अनुवाद किया गया है, जो एक सकारात्मक कदम है। इस पर भारतीय जनता पार्टी के पार्षद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दे रहे थे। राबड़ी देवी ने फिर आगे कहा, “हम चाहते हैं कि मिथिला क्षेत्र अलग राज्य बने, ताकि यहां की संस्कृति, भाषा और परंपराओं को सही सम्मान मिल सके।”

राजनीतिक प्रतिक्रिया

बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर का कहना है कि राबड़ी देवी और उनकी पार्टी का यह कदम राज्य की सामाजिक और धार्मिक स्थिति को अस्थिर करने की कोशिश हो सकता है। हालांकि, आरजेडी और राबड़ी देवी ने इसे बिहार के विकास के लिए एक जरूरी कदम बताया है।

इस पूरे विवाद में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या मिथिलांचल को अलग राज्य बनाने की मांग राजनीतिक लाभ के लिए की जा रही है, या यह सच में क्षेत्रीय विकास के उद्देश्य से है। फिलहाल इस मुद्दे पर सियासत गर्माई हुई है, और आने वाले दिनों में इसे लेकर और भी बयानबाजी हो सकती है।

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